उतरौला में अधिवक्ताओं का आंदोलन थमा

मांगों पर बनी सहमति, शासन स्तर पर जारी रहेगी लड़ाई

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स्वतंत्र प्रभात संवाददाता 

उतरौला (बलरामपुर)

उतरौला तहसील में पिछले 35 दिनों से जारी अधिवक्ता संघ का कलमबंद हड़ताल और कार्य बहिष्कार आखिरकार स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हुई वार्ता में सकारात्मक सहमति बनने के बाद यह फैसला लिया गया। लंबे समय से अधिवक्ताओं के आंदोलन के कारण प्रभावित हो रहे तहसील के कामकाज को अब गति मिलने की उम्मीद जगी है। हालांकि, अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगों को लेकर संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है और वे समाधान के लिए उच्च स्तर पर अपनी बात रखेंगे।

अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रह्लाद यादव और महामंत्री रविशंकर मिश्र ने बताया कि आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर वार्ता के लिए उपजिलाधिकारी योगेंद्र शरण शाह की ओर से क्रमिक अनशन स्थल पर पत्र भेजा गया था। इसके बाद तहसील सभागार में अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों और सदस्यों की उपजिलाधिकारी योगेंद्र शरण शाह तथा तहसीलदार वीरेंद्र प्रताप के साथ बैठक हुई। बैठक में अधिवक्ताओं ने अपनी समस्याओं, लंबित मांगों और कार्य बहिष्कार की परिस्थितियों से अधिकारियों को अवगत कराया।

वार्ता के दौरान अधिवक्ताओं ने अपनी मांगों के समाधान पर जोर दिया। अधिकारियों ने उनकी उचित मांगों पर सहमति जताई, जिसके बाद आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति तय करने का रास्ता साफ हुआ। वार्ता को सकारात्मक बताते हुए दोनों पक्षों के बीच संवाद को महत्वपूर्ण माना गया।

अधिकारियों के साथ बैठक समाप्त होने के बाद अधिवक्ता संघ की आमसभा आयोजित की गई। इसमें वार्ता के दौरान सामने आए बिंदुओं और प्रशासन के रुख पर विस्तार से चर्चा हुई। संघ के सदस्यों ने अपने विचार रखे और आंदोलन की आगामी दिशा पर मंथन किया। विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से 35 दिनों से जारी कलमबंद हड़ताल और कार्य बहिष्कार को स्थगित करने का निर्णय लिया गया।

इस फैसले से तहसील में लंबे समय से प्रभावित राजस्व और अन्य तहसील संबंधी कार्यों के फिर से सुचारु होने की संभावना बढ़ गई है। आम नागरिकों को भी अपने जरूरी कामकाज के लिए राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, कामकाज पूरी तरह सामान्य होने की स्थिति आगे की प्रक्रिया और संबंधित मामलों के निस्तारण पर निर्भर करेगी।

अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रह्लाद यादव ने स्पष्ट किया कि कार्य बहिष्कार स्थगित करने का अर्थ मांगों से पीछे हटना नहीं है। अधिवक्ताओं के हितों और उठाए गए मुद्दों के समाधान के लिए संगठन आगे भी प्रयास करता रहेगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में एक प्रतिनिधिमंडल राजस्व परिषद, बार काउंसिल और शासन के प्रमुख सचिव से मुलाकात कर अपनी बात रखेगा तथा विरोध दर्ज कराएगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आगे की कार्रवाई के दौरान कार्य बहिष्कार नहीं किया जाएगा। इस तरह अधिवक्ता संघ ने एक ओर तहसील में कामकाज को आगे बढ़ाने का रास्ता खोला है, वहीं दूसरी ओर अपनी मांगों के समाधान के लिए प्रशासन और शासन स्तर पर प्रयास जारी रखने का निर्णय लिया है।

बैठक में देवेंद्र कुमार, विजय प्रकाश, अमित कुमार, अखिलेश सिंह, कमल किशोर गुप्त, आशीष कसौधन, निजाम अंसारी, प्रवीण कुमार, इजहारुल हसन, शमशाद चौधरी, जयकरण भारती, धर्मेंद्र तिवारी, इरशाद अहमद, सुमित कुमार, आयशा फेजान खान, शुभम गुप्ता, अखिल श्रीवास्तव और विनीश गुप्ता सहित अधिवक्ता संघ के अन्य सदस्य मौजूद रहे।

कुल मिलाकर, 35 दिनों से चले आ रहे आंदोलन को स्थगित करने का निर्णय अधिवक्ता संघ और प्रशासन के बीच संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि वार्ता में बनी सहमति के अनुरूप मांगों के समाधान की प्रक्रिया कितनी आगे बढ़ती है और तहसील का कामकाज किस तरह पूरी तरह सामान्य हो पाता है।


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