बैराजों से छोड़े गए पानी का सीतापुर में असर शारदा-घाघरा उफान पर

20 से अधिक गांवों पर मंडराया ख़तरा 

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सीतापुर-  जनपद सीतापुर में बैराजों से छोड़े गए करीब तीन लाख क्यूसेक पानी का असर सीतापुर में लगातार चौथे दिन भी देखने को मिल रहा है। शारदा और घाघरा नदियों के जलस्तर में लगातार 10 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है हालांकि दोनों नदियां अभी भी खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं, लेकिन तटवर्ती क्षेत्रों में हालात धीरे-धीरे गंभीर होने लगे हैं। करीब 150 बीघा कृषि योग्य भूमि जलमग्न होने लगी है जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों को अलर्ट मोड पर रखते हुए निगरानी बढ़ा दी है।

रामपुर मथुरा और रेउसा विकासखंड क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने का सबसे अधिक प्रभाव दिखाई दे रहा है नगेश्वरपुरवा और बचऊपुरवा गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी भर जाने से ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हो गया है। लोगों को आने-जाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं रेउसा क्षेत्र के 20 से अधिक गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है, जिससे ग्रामीणों में चिंता का माहौल है। नदियों की तेज कटान जारी उधर, बेहटा विकासखंड के ग्राम खाना मंडोर क्षेत्र में नदियों की तेज कटान जारी है।

नदी का बढ़ता पानी गन्ने और धान की फसलों तक पहुंचने लगा है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान की आशंका सता रही है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। एसडीएम लहरपुर दामिनी एम. दास ने बताया कि कटान प्रभावित स्थानों पर सिंचाई विभाग की टीमों को लगाया गया है। बालू से भरी बोरियों और जियो बैग के माध्यम से कटान रोकने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि फिलहाल दोनों नदियां खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं, जिससे तत्काल बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है। इसके बावजूद प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और लेखपालों की क्लस्टरवार ड्यूटी लगाकर जलस्तर की लगातार निगरानी कराई जा रही है!!

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