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युवाओं को नशे के चंगुल से बचाना राष्ट्रीय संकल्प देश की शक्ति और भविष्य की रक्षा का सबसे बड़ा अभियान
उनका यह संदेश केवल चेतावनी नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए जागने का आह्वान है।
भारत आज दुनिया का सबसे युवा देश माना जाता है। देश की बड़ी आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है और यही युवा शक्ति भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की सबसे बड़ी उम्मीद भी है। यदि यह ऊर्जा सही दिशा में आगे बढ़े तो भारत विज्ञान प्रौद्योगिकी शिक्षा उद्योग खेल और नवाचार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकता है। लेकिन यदि यही युवा वर्ग नशे की गिरफ्त में चला जाए तो यह केवल एक व्यक्ति या परिवार की समस्या नहीं रहती बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के लिए गंभीर चुनौती बन जाती है। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नशे के खिलाफ व्यापक जनजागरण का आह्वान करते हुए कहा कि युवाओं को नशे के चंगुल में फंसाने के पीछे देश विरोधी ताकतों की साजिश भी हो सकती है। उनका यह संदेश केवल चेतावनी नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए जागने का आह्वान है।
नशा आज केवल शराब या तंबाकू तक सीमित नहीं है। सिंथेटिक ड्रग्स हेरोइन कोकीन चरस गांजा और कई प्रकार के रासायनिक पदार्थ तेजी से युवाओं तक पहुंच रहे हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से भी नशे का जाल फैलाने की कोशिशें हो रही हैं। कई बार युवाओं को आधुनिक जीवनशैली या फैशन के नाम पर नशे की ओर आकर्षित किया जाता है। शुरुआत शौक के रूप में होती है लेकिन धीरे धीरे यह लत बन जाती है और फिर व्यक्ति का जीवन पूरी तरह बर्बाद हो जाता है।
नशे का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव व्यक्ति के स्वास्थ्य पर पड़ता है। यह मस्तिष्क हृदय फेफड़ों और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचाता है। मानसिक तनाव अवसाद चिंता और आत्मविश्वास की कमी जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित होती है। नौकरी करने वाले युवाओं की कार्यक्षमता घट जाती है। कई बार नशे की लत अपराध हिंसा सड़क दुर्घटनाओं और पारिवारिक विवादों का कारण भी बनती है। इस प्रकार नशा केवल व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज का भविष्य अंधकारमय बना देता है।
भारत जैसे देश में जहां युवाओं से विकसित भारत का सपना जुड़ा है वहां नशे की समस्या और भी गंभीर हो जाती है। देश की अर्थव्यवस्था उद्योग कृषि रक्षा विज्ञान और तकनीक सभी क्षेत्रों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी युवाओं पर है। यदि बड़ी संख्या में युवा नशे के शिकार होंगे तो देश की उत्पादक क्षमता और सामाजिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। यही कारण है कि नशे के खिलाफ लड़ाई को केवल स्वास्थ्य अभियान नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का अभियान माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से अपील की है कि वे नशे से दूर रहें और अपने जीवन को सकारात्मक दिशा दें। उन्होंने यह भी कहा कि नशे के कारोबार से जुड़ा धन कई बार देश विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देता है। सीमा पार से होने वाली ड्रग्स की तस्करी केवल अवैध व्यापार नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकती है। इसलिए नशे के खिलाफ संघर्ष कानून व्यवस्था का ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी विषय है।
देश में केंद्र और राज्य सरकारें नशे की रोकथाम के लिए अनेक कदम उठा रही हैं। सीमाओं पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां लगातार ड्रग्स माफिया के नेटवर्क को तोड़ने में लगी हैं। स्कूल कॉलेज और विश्वविद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि युवा शुरुआत में ही इस खतरे को समझ सकें। इसके साथ ही नशा मुक्ति केंद्रों के माध्यम से उपचार और परामर्श की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
हालांकि केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। माता पिता को अपने बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए। बच्चों के साथ खुलकर संवाद करना उन्हें समय देना और उनकी समस्याओं को समझना आवश्यक है। कई बार अकेलापन तनाव असफलता या गलत संगति युवाओं को नशे की ओर ले जाती है। यदि परिवार समय रहते सहयोग और मार्गदर्शन दे तो अनेक युवा इस रास्ते पर जाने से बच सकते हैं।
शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। विद्यालय और महाविद्यालय केवल शिक्षा देने के केंद्र नहीं बल्कि व्यक्तित्व निर्माण के स्थान भी हैं। यहां खेल सांस्कृतिक गतिविधियां योग ध्यान और नैतिक शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को सकारात्मक वातावरण दिया जा सकता है। यदि युवाओं की ऊर्जा रचनात्मक कार्यों में लगेगी तो उनके नशे की ओर आकर्षित होने की संभावना कम होगी।
समाज को भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। धार्मिक संस्थाएं सामाजिक संगठन स्वयंसेवी संस्थाएं और स्थानीय समुदाय मिलकर जागरूकता अभियान चला सकते हैं। नशे को सामाजिक प्रतिष्ठा या आधुनिकता का प्रतीक मानने की गलत सोच को बदलना होगा। फिल्मों सोशल मीडिया और मनोरंजन के अन्य माध्यमों को भी जिम्मेदारी के साथ सकारात्मक संदेश देना चाहिए।
युवाओं को स्वयं भी यह समझना होगा कि जीवन की वास्तविक सफलता नशे में नहीं बल्कि ज्ञान मेहनत अनुशासन और आत्मविश्वास में है। खेल संगीत साहित्य विज्ञान और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का उपयोग करके वे अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं। कठिन परिस्थितियों में भी नशे का सहारा लेने के बजाय परिवार मित्रों शिक्षकों और विशेषज्ञों से सलाह लेना अधिक उचित मार्ग है।
भारत ने आज दुनिया में अपनी नई पहचान बनाई है। अंतरिक्ष से लेकर डिजिटल तकनीक तक हर क्षेत्र में देश आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश का युवा स्वस्थ शिक्षित आत्मविश्वासी और नशामुक्त होगा। इसलिए नशे के खिलाफ अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि जन आंदोलन बनना चाहिए। प्रत्येक नागरिक को यह संकल्प लेना होगा कि वह स्वयं नशे से दूर रहेगा और दूसरों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेगा।
युवाओं को नशे से बचाना केवल एक सामाजिक आवश्यकता नहीं बल्कि राष्ट्र के भविष्य की रक्षा का संकल्प है। जब युवा स्वस्थ होंगे तभी परिवार मजबूत होंगे समाज सुरक्षित होगा और भारत विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। यही समय है कि पूरा देश एकजुट होकर नशे के विरुद्ध आवाज उठाए और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित स्वस्थ और सशक्त भारत का निर्माण करे।
*कांतिलाल मांडोत
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