नगर विधायक बोले- पत्रकार न रहें तो सरकार तानाशाह हो जाएगी

हिन्दी पत्रकारिता दिवस मीरजापुर प्रेस क्लब ट्रस्ट के कार्यक्रम में मंथन,

Mirzapur Swatantra Prabhat Picture
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पत्रकार भवन का रास्ता साफ, पालिकाध्यक्ष ने जमीन, नगर विधायक ने 10 लाख अनुदान किया घोषित,एमएलसी ने भरी सहमति 

मीरजापुर। 

रामलाल साहनी

मिर्जापुर। हिन्दी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर मीरजापुर प्रेस क्लब ट्रस्ट द्वारा आयोजित "वैश्विक परिदृश्य में पत्रकारिता" विषयक संगोष्ठी में पत्रकारिता की चुनौतियों, लोकतंत्र में उसकी भूमिका और बदलते मीडिया परिवेश पर गंभीर मंथन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन नगर के लाल डिग्गी स्थित लायंस स्कूल सभागार में किया गया था। 

मुख्य वक्ता अरुण आनंद ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौर की पत्रकारिता एक मिशन हुआ करती थी, जिसका उद्देश्य देश और समाज की सेवा करना था। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पत्रकारिता के स्वरूप में धीरे-धीरे बदलाव आया और समय के साथ इसमें व्यावसायिकता का प्रभाव बढ़ता गया।

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उन्होंने आपातकाल के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय मीडिया पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे। समाचार पत्रों को स्याही तक उपलब्ध नहीं हो पाती थी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगा दिया गया था। लेखन और प्रकाशन पर नियंत्रण के कारण पत्रकारों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
अरुण आनंद ने कहा कि वर्तमान समय में परिस्थितियां भले ही अलग हों, लेकिन पत्रकारिता नई चुनौतियों से जूझ रही है। उन्होंने कहा कि आज मीडिया संस्थानों को आर्थिक संसाधन तो उपलब्ध हैं, किंतु स्वतंत्र और निष्पक्ष लेखन पर विभिन्न प्रकार के दबाव महसूस किए जा रहे हैं। कई बार अधिकारियों या प्रभावशाली व्यक्तियों के खिलाफ खबर प्रकाशित होने पर पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर मुकदमे दर्ज कराए जाते हैं, जिससे स्वतंत्र पत्रकारिता प्रभावित होती है।

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उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकारों के सामने नौकरी की असुरक्षा भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। कभी भी रोजगार छिन जाने की आशंका के कारण कई पत्रकार खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए पत्रकारिता की स्वतंत्रता और निष्पक्षता का सुरक्षित रहना अत्यंत आवश्यक है।

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इस मौके पर नगर विधायक पं. रत्नाकर मिश्र ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं। यदि पत्रकार न रहें तो सरकार तानाशाह हो जाएगी। उन्होंने कहा कि भारत को अब "सोने की चिड़िया" नहीं बल्कि "बब्बर शेर" बनना चाहिए। चिड़िया बनने पर उसे फिर कोई लूट सकता है, जबकि बब्बर शेर बनने पर वह अपनी सुरक्षा और सम्मान की रक्षा स्वयं कर सकता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में सत्य और निष्पक्षता सबसे बड़ी ताकत है, प्रभाव पैदा करने की नहीं बल्कि सत्य को सामने लाने की आवश्यकता है।


उन्होंने भगवान शिव के परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि परिवार में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए। इसी तरह पत्रकारों को भी एक मंच पर रहकर समाज और लोकतंत्र के हित में कार्य करना चाहिए। 

एमएलसी विनीत सिंह ने पत्रकारों को गुटबाजी से दूर रहने का आह्वान करते हुए कहा कि झाड़ू बंधी रहती है तो सफाई करती है, लेकिन बिखर जाने पर स्वयं कचरा बन जाती है। उन्होंने निष्पक्ष पत्रकारिता को लोकतंत्र की आवश्यकता बताते हुए पत्रकारों से एकजुट रहने का आह्वान किया। पत्रकार भवन की मांग पर चर्चा के दौरान पालिकाध्यक्ष श्याम सुंदर केशरी ने भूमि उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इस पर नगर विधायक पं. रत्नाकर मिश्र ने पत्रकार भवन निर्माण के लिए 10 लाख रुपये देने की घोषणा की। विनीत सिंह ने जमीन मिलने पर दूसरे दिन से निर्माण कार्य कराने का भरोसा दिया। 


कार्यक्रम में राष्ट्रवादी मंच के मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता कठिन दौर से गुजर रही है और पीत पत्रकारिता लोकतंत्र के लिए खतरा बनती जा रही है। उन्होंने पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनाए रखने पर जोर दिया।
संपादक कृष्णानंद त्रिपाठी ने कहा, "जो छिपाया जाए वह खबर है और जो दिखाया जाए वह प्रचार है।" उन्होंने खोजी पत्रकारिता के कमजोर पड़ने पर चिंता जताई और नई पीढ़ी के पत्रकारों से अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने का आह्वान किया। डॉ योगानंद गिरी ने पत्रकारिता की विश्वसनीयता को बनाए रखने पर जोर दिया। 


 कार्यक्रम में पत्रकारिता की गरिमा, निष्पक्षता, ज्ञान के प्रसार तथा लोकतंत्र को मजबूत बनाने में मीडिया की भूमिका पर व्यापक चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारिता की विश्वसनीयता और सामाजिक सरोकारों को बनाए रखना आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती है।


कार्यक्रम का विषय प्रवर्तन संयोजक अमरेश मिश्र, अध्यक्षता राजेश मिश्र एवं संचालन संतोष ऊमर ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पत्रकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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