चित्रकूट कांड: दरिंदों को फांसी तक पहुंचाने वाली पेन ड्राइव किसने दी? रहस्य बरकरार

करीबी ही बना सबसे बड़ा दुश्मन पहले से संदिग्ध था आरोपी पत्नी की निशानदेही से मिले सबूत अब भी बना हुआ है रहस्य

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चित्रकूट/बांदा।

चित्रकूट के चर्चित बाल यौन शोषण मामले में पॉक्सो कोर्ट द्वारा दोषी दंपति रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद एक बड़ा सवाल चर्चा में है—आखिर वह पेन ड्राइव किसने Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंपी, जो इस मामले में सबसे अहम सबूत साबित हुई। इसी डिजिटल साक्ष्य के आधार पर अदालत ने दोष तय करते हुए सख्त सजा सुनाई।

बताया जा रहा है कि इस पेन ड्राइव में कई बच्चों के शोषण से जुड़े वीडियो थे, जो कथित रूप से डार्क वेब पर विदेशों तक बेचे गए थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक यह डिजिटल सामग्री ही केस का निर्णायक सबूत बनी। हालांकि, CBI ने अब तक उस व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक नहीं की है, जिसने यह पेन ड्राइव उपलब्ध कराई।

करीबी ही बना सबसे बड़ा दुश्मन

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, रामभवन का कोई बेहद करीबी व्यक्ति ही बाद में उसका दुश्मन बन गया और उसने ही जांच एजेंसियों को महत्वपूर्ण जानकारी दी। बताया जाता है कि किसी लेनदेन विवाद के बाद यह व्यक्ति CBI के संपर्क में आया और उसने रामभवन के खिलाफ कई अहम राज खोले। इसी दौरान एजेंसी को वह पेन ड्राइव भी सौंपी गई, जिसने पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया।

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जांच के दौरान Interpol से मिले इनपुट के आधार पर CBI पहले से ही एक अंतरराष्ट्रीय एंगल की जांच कर रही थी। सुराग मिलते ही टीम चित्रकूट पहुंची और छापेमारी कर आरोपी दंपति को गिरफ्तार कर लिया गया।

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पहले से संदिग्ध था आरोपी

रामभवन मूल रूप से नरैनी क्षेत्र के खरौंच गांव का रहने वाला था और गिरफ्तारी के समय वह सिंचाई परियोजनाओं में जूनियर इंजीनियर के पद पर तैनात था। स्थानीय लोगों का कहना है कि उसकी गतिविधियां पहले से ही संदिग्ध मानी जाती थीं और कई जगहों पर उसके व्यवहार को लेकर शिकायतें भी हुई थीं।

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पत्नी की निशानदेही से मिले सबूत

गिरफ्तारी के बाद दुर्गावती की निशानदेही पर जांच एजेंसियों ने घर से नकदी, कई मोबाइल फोन, लैपटॉप और बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक डिजिटल सामग्री बरामद की। इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच से केस को मजबूत करने में मदद मिली।

अब भी बना हुआ है रहस्य

हालांकि अदालत का फैसला आ चुका है और दोषियों को सजा भी सुनाई जा चुकी है, लेकिन वह शख्स कौन था जिसने CBI को पेन ड्राइव दी—यह अब भी रहस्य बना हुआ है। एजेंसी ने सुरक्षा कारणों से मुखबिर की पहचान उजागर नहीं की है।

इस मामले में सजा के बाद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि अगर वह व्यक्ति आगे न आता, तो शायद इतने बड़े अपराध का खुलासा भी नहीं हो पाता। फिलहाल, दोषियों को सजा मिलने के बाद पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।

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