महेशपुर विधायक प्रो. स्टीफन मरांडी को जल सहिया संघ ने सौंपा ज्ञापन

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पाकुड़, झारखंड:-  झारखंड राज्य जल सहिया संघ, महेशपुर एवं पाकुड़िया प्रखंड कमेटी के एक प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को विधायक प्रो. स्टीफन मरांडी को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक मांग पत्र सौंपा। विधायक को सौंपे गए मांग पत्र में कहा गया कि झारखंड राज्य में वर्षों से पेयजल व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली जल सहियाओं के साथ विभागीय अधिकारियों द्वारा लगातार उपेक्षा, लापरवाही एवं अन्याय किया जा रहा है। सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों को जमीनी स्तर पर लागू नहीं किए जाने के कारण राज्य भर की जल सहियाएं आर्थिक, मानसिक एवं सामाजिक संकट से गुजर रही हैं।
 
यह सर्वविदित है कि लंबे संघर्ष के बाद सरकार द्वारा जल सहियाओं के कई माह के लंबित मानदेय भुगतान हेतु राज्य के सभी जिलों में राशि आवंटित की गई थी। परंतु कार्यपालक अभियंताओं एवं संबंधित अधिकारियों की घोर लापरवाही, उदासीनता एवं मनमानी के कारण कुछ जिलों में मात्र 50 प्रतिशत तथा कुछ में 30 प्रतिशत राशि का ही भुगतान किया गया। मार्च क्लोजिंग का बहाना बनाते हुए शेष राशि राज्य को वापस कर दी गई। अप्रैल 2024 से दो वर्ष बीत जाने के बावजूद उक्त राशि का पुनः आवंटन अब तक नहीं किया गया है। विभाग द्वारा यह कहकर भुगतान टाला जा रहा है कि राज्य से राशि प्राप्त नहीं हुई है। इस प्रशासनिक विफलता के कारण हजारों जल सहियाएं महीनों से बिना मानदेय एवं प्रोत्साहन राशि के कार्य करने को मजबूर हैं। जल सहिया अत्यंत गरीब महिला श्रमिक होती हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और भी दयनीय होती जा रही है।
 
जल सहियाओं की प्रमुख मांगों में सबसे पहले यह शामिल है कि उन्हें महंगाई के अनुरूप न्यूनतम मजदूरी के समकक्ष मानदेय तुरंत लागू किया जाए। इसके साथ ही वे मांग करती हैं कि उन्हें 20 लाख रुपये की जीवन बीमा राशि का लाभ प्रदान किया जाए तथा कार्य के दौरान या आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में उनके आश्रितों को अनुकम्पा के आधार पर सरकारी नौकरी या समुचित आर्थिक सहायता देने की स्पष्ट और बाध्यकारी नीति बनाई जाए।
 
जल सहियाओं का यह भी कहना है कि शहरी क्षेत्रों में कार्यरत सहियाओं को नगर निगम या नगर परिषद में समायोजित किया जाए और जल जीवन मिशन में उनकी अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित की जाए। वे यह भी आग्रह करती हैं कि मुखिया द्वारा बिना लिखित कारण बताए जल सहियाओं को मनमाने ढंग से हटाए जाने की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए और इस संबंध में स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएं।
 
उनकी एक अन्य मांग यह है कि जल सहियाओं को स्थायी नीति और नियोजन प्रक्रिया के अंतर्गत समायोजित किया जाए तथा कार्य निष्पादन के लिए आवश्यक मोबाइल रिचार्ज भत्ता अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जाए। इसके अलावा, जिन जिलों में मानदेय और प्रोत्साहन राशि का भुगतान करने हेतु आवंटित धनराशि को मार्च क्लोजिंग का हवाला देकर राज्य को वापस कर दिया गया है, उस राशि को तुरंत पुनः आवंटित किया जाए और लंबित भुगतान का पूरा निपटारा कराया जाए। साथ ही, इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
 
अंत में, प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग की कि पाकुड़ के कार्यपालक अभियंता द्वारा स्वच्छ भारत मिशन के तहत वर्षों पूर्व निर्मित व्यक्तिगत शौचालयों—जिनका जियो-टैगिंग और तकनीकी स्वीकृति कार्य पूरा हो चुका है—का भुगतान अब तक लंबित है, इसलिए इसका भुगतान अविलंब कराया जाए।
 
विधायक प्रो. स्टीफन मरांडी ने आश्वासन दिया कि विधानसभा के आगामी सत्र/बजट सत्र में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव अथवा स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से सभी प्रमुख मांगों को वे विधानसभा के पटल पर उठाएंगे।मौके पर सुनीता देवी, नूरजहां खातून, रीना देवी, एलिज़ाबेथ मुर्मू, अनीता सोरेन, शरीफ़ा खातून, तुहिना खातून, ताहिरा बीबी, जीना देवी सहित अन्य जल सहियाएँ उपस्थित थीं। 

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