राजनीति
देश के 30 शहरों में पानी के लिए मचेगा हाहाकार
16 करोड़ लोग पी रहे गंदा पानी
ब्यूरो प्रयागराज। जीवन के लिए पानी 'अमृत' समान है. यह लोगों की बुनियादी जरूरत है. शहरीकरण और औद्योगीकरण ने काफी हद तक इसकी गुणवत्ता को प्रभावित किया है. ग्राउंड वाटर लेवल भी साल दर साल नीचे जा रहा है. एक रिपोर्ट के अनुसार देश के 60 करोड़ लोग पानी की। किल्लत से जूझ रहे हैं जबकि 16 करोड़ लोग गंदा पानी पी रहे हैं.
केंद्रीय भूमि जल बोर्ड ने वार्षिक भूजल गुणवत्ता रिपोर्ट 2025 जारी की. इसमें देशभर में ग्राउंड वाटर क्वालिटी का पता लगाने के लिए 2023 को बेस ईयर मानकर कुल 15,259 सैंपल इकट्ठा किए गए. साल 2024 में 5 हजार 368 स्टेशनों से ये नमूने लिए गए. इनमें से कुछ मानसून से पहले जबकि कुछ मानसून के बाद के थे.
इनकी जांच अमेरिकन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन में दिए गए स्टैंडर्ड तरीकों से कराई गई. जांच के पीछे का मकसद पीने और खेती के लिए इस्तेमाल होने पानी की गुणवत्ता को अलग-अलग पैरामीटर पर परखना था. जांच में कई राज्यों के पेयजल शुद्ध पाए गए जबकि कई स्टेट में ये काफी प्रदूषित मिले.
जांच में अरुणाचल, मिजोरम, मेघालय और जम्मू कश्मीर के 100% नमूने BIS (भारतीय मानक ब्यूरो ) के अनुरूप पाए गए. यानी यहां का पानी पूरी तरह शुद्ध है. लिहाजा ये पीने और फसलों की सिंचाई के लिए काफी उपयुक्त है. यहां के लोगों को दूषित पानी से होने वाली बीमारियों को लेकर फिक्रमंद होने की जरूरत नहीं है.
कम आबादी और कम औद्योगीकरण के कारण यहां पानी की गुणवत्ता ठीक है. इन राज्यों में इंडस्ट्रियल कचरे और शहरी प्रदूषण का दबाव कम है. मानसून में होने वाली ज्यादा बारिश सतह और ग्राउंड वाटर को रिचार्ज करने में मदद करती है. यहां सीमित खेती होती है. मतलब फर्टिलाइजर/पेस्टीसाइड का प्रयोग कम किया जाता है.
राजस्थान, आंध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, कर्
राजस्थान, आंध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, कर्
25% स्टेशन (जहां से नमून लिए गए थे) BIS के मानकों पर खरे नहीं उतरे. मतलब यहां पानी की गुणवत्ता सही नहीं पाई गई. सैंपलों की जांच में बड़ी चिंताएं सामने आईं. ग्राउंड वाटर में नाइट्रेट, फ्लोराइड और EC (Electrical Conductivity) की मात्रा ज्यादा मिली. करीब 20.7% सैंपल में नाइट्रेट तय मानक से ज्यादा पाए गए. 8.05% सैंपल में फ्लोराइड का स्तर ज्यादा मिला.
लगभग 20.7% सैंपल नाइट्रेट की तय लिमिट से ज्यादा थे, जबकि 8.05% सैंपल में फ्लोराइड का लेवल मानक से ज्यादा था. 7.23% सैंपल EC से दूषित पाए गए. राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में नेचुरल हाइड्रोकेमिकल प्रोसेस की वजह से क्लोराइड सांद्रता (Concentration) ज्यादा है.।

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