पाकिस्तान के गुप्त परमाणु परीक्षण के दावे से बढ़ी चिंता, क्या भारत करेगा पोखरण–III?

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International Desk 

नई दिल्ली। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दिए गए हालिया बयान ने अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलचल तेज कर दी है। एक टीवी साक्षात्कार में ट्रम्प ने दावा किया कि पाकिस्तान और चीन गुप्त रूप से परमाणु परीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रूस और उत्तर कोरिया भी इसी प्रकार की गतिविधियों में शामिल हैं। ट्रम्प ने यह तर्क देते हुए कहा कि जब अन्य देश खुले या गुप्त रूप से परमाणु परीक्षण कर रहे हैं, तो अमेरिका को भी परीक्षण फिर से शुरू करने की आवश्यकता पड़ेगी।

ट्रम्प के इस दावे ने भारत की सुरक्षा चिंताओं को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। भारत के सामने एक ओर चीन और दूसरी ओर पाकिस्तान जैसे परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र खड़े हैं। भारत ने वर्ष 1998 में पोखरण-द्वितीय परीक्षण के बाद से कोई भी नया परमाणु परीक्षण नहीं किया है, जबकि पाकिस्तान और चीन अपने परमाणु कार्यक्रम तथा मिसाइल तकनीक को लगातार सुदृढ़ कर रहे हैं।

चीन-पाकिस्तान की तैयारी से चिंतित भारत
रिपोर्टों के अनुसार वर्तमान समय में चीन के पास लगभग 600 परमाणु वारहेड हैं, जबकि भारत के पास लगभग 180 और पाकिस्तान के पास करीब 170 वारहेड माने जाते हैं। चीन 2030 तक अपने परमाणु हथियार भंडार को 1,000 तक बढ़ाने की दिशा में कार्यरत है। वहीं पाकिस्तान सामरिक परमाणु हथियार (टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन्स) विकसित कर भारत की ‘कोल्ड स्टार्ट डॉक्ट्रिन’ को चुनौती दे रहा है।

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चीन ने हाल के वर्षों में फ्रैक्शनल ऑर्बिटल बॉम्बार्डमेंट सिस्टम (FOBS) जैसी उन्नत तकनीक का परीक्षण किया है, जो मिसाइल रक्षा प्रणालियों को भ्रमित करने में सक्षम है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तकनीकी सहयोग से भारत की रणनीतिक स्थिति पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है।

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क्या भारत को करना चाहिए पोखरण–III?
ट्रम्प के दावों के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या भारत को अब पोखरण–III के रूप में नया परमाणु परीक्षण करना चाहिए? रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की ‘नो-फर्स्ट-यूज़ (NFU)’ यानी पहले परमाणु हमला न करने की नीति उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में स्थापित करती है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां इस नीति की समीक्षा की मांग कर सकती हैं।

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विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि चीन और पाकिस्तान गुप्त रूप से परीक्षण कर रहे हैं, तो भारत को अपनी हाइड्रोजन बम क्षमता (थर्मोन्यूक्लियर वेपन) और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) तकनीक को परखने के लिए वैज्ञानिक विकल्पों या वैध परीक्षण की दिशा में कदम बढ़ाना पड़ेगा। हालांकि इसका निर्णय केवल सैन्य दृष्टि से नहीं, बल्कि कूटनीतिक और आर्थिक प्रभावों को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए।

भारत की शांतिपूर्ण नीति, लेकिन सतर्क दृष्टिकोण
भारत की परमाणु नीति हमेशा ‘विश्व शांति और जिम्मेदार उपयोग’ पर आधारित रही है। भारत ने कभी भी परमाणु शक्ति का प्रदर्शन युद्ध के लिए नहीं, बल्कि प्रतिरोधक क्षमता (Deterrence) के रूप में किया है। अग्नि सीरीज़ की मिसाइलें, INS अरिहंत परमाणु पनडुब्बी और के-श्रृंखला की SLBM क्षमताएं भारत की मजबूत तकनीकी स्थिति को दर्शाती हैं।

 

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