दैविक पोखरे में मछलियों की मौत से सतुआभार में मातम, ग्रामीणों की आस्था आहत !

पूज्य मानी जाती हैं पोखरे की मछलियां और कछुए,

शत्रुघन मणि त्रिपाठी  Picture
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विधिवत कफन-दफन की तैयारी; मौत की पूज्य मानी जाती हैं पोखरे की मछलियां और कछुए, विधिवतवजह बनी रहस्य

जिला/ब्यूरो कार्यालय रिपोर्ट-रामअशीष तिवारी (गोरखपुर) 

खजनी, गोरखपुर। खजनी क्षेत्र के सतुआभार गांव में शनिवार को उस समय ग्रामीण हैरान और भावुक हो उठे, जब गांव के आस्था के केंद्र माने जाने वाले दैविक पोखरे में बड़ी संख्या में मछलियां अचानक मृत मिलीं। पोखरे में मछलियों की मौत की खबर फैलते ही मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। देखते ही देखते मछलियों की मौत गांव में चर्चा और चिंता का विषय बन गई। ग्रामीणों के लिए यह केवल जलीय जीवों की मौत नहीं, बल्कि उनकी वर्षों पुरानी आस्था से जुड़ा मामला है।

ग्रामीणों के मुताबिक दैविक पोखरे की मछलियों और विशाल कछुओं को पूज्य माना जाता है। मान्यता है कि पोखरे में सदियों से बड़े कछुए और मछलियां वास करते हैं और गांव के लोग उनकी रक्षा को अपनी जिम्मेदारी मानते हैं। यहां की मछलियों को पकड़ना या खाना पूरी तरह वर्जित माना जाता है। ग्रामीणों में ऐसी मान्यता भी है कि जिसने कभी पोखरे की पूज्य मछलियों को नुकसान पहुंचाया, उसका जीवन संकटों से घिर गया।

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शनिवार को अचानक बड़ी संख्या में मछलियों के मरने से ग्रामीणों के चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दी। आखिर एक साथ इतनी मछलियां क्यों मर रही हैं, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। ग्रामीणों ने पोखरे के पानी का नमूना एकत्र कर जांच कराने की तैयारी शुरू कर दी है, ताकि मछलियों की मौत का वास्तविक कारण सामने आ सके।

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भीष्मधर दुबे, अर्जुन दुबे, परमात्मा दुबे, पूर्व प्रधान बच्चा दुबे समेत दर्जनों ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे। सभी ने मछलियों की मौत पर गहरा दुख जताया। ग्रामीणों ने स्थानीय पुलिस को भी सूचना दी है। ग्रामीणों के अनुसार दैविक पोखरे में किसी मछली या कछुए की मौत होने पर उसे सामान्य तरीके से नहीं छोड़ा जाता, बल्कि धार्मिक मान्यता के अनुसार कफन के साथ विधिवत मिट्टी में दफन किया जाता है। मृत मछलियों को भी इसी परंपरा के तहत दफन करने की तैयारी की जा रही है।

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ग्रामीणों ने बताया कि करीब एक दशक पूर्व पोखरे के आसपास से दो दर्जन बड़े कछुओं के गायब होने की घटना भी सामने आई थी। ग्रामीणों का आरोप था कि ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले झारखंड के कुछ मजदूरों ने कछुओं को पकड़कर खा लिया था। बाद में कछुओं के ऊपरी खोल भट्ठे के पास मिलने की बात कही गई थी। ग्रामीण इस घटना को भी अपनी आस्था से जोड़कर देखते हैं। उनका कहना है कि इसके बाद संबंधित भट्ठा धीरे-धीरे बंद हो गया और आज उसका अस्तित्व तक नहीं बचा है।

फिलहाल मछलियों की मौत ने सतुआभार में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों को जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि दैविक पोखरे की मछलियों की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या पानी में किसी तरह के प्रदूषण के कारण।

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