गोरखपुर: गोला का पड़ौली बाजार बना हरे पेड़ों के अवैध कटान का अड्डा, ग्रामीणों में आक्रोश

प्रतिबंधित वृक्षों की कटाई का आरोप, ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की उठाई मांग

शत्रुघन मणि त्रिपाठी  Picture
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 रिपोर्टर- बृजनाथ तिवारी ( ग़ोला तहसील )

ग़ोला बाजार /गोरखपुर। गोला थाना क्षेत्र का पड़ौली बाजार इन दिनों प्रतिबंधित हरे पेड़ों के कथित अवैध कटान को लेकर चर्चा में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से पीपल, बरगद, पाकड़, महुआ और आम जैसे पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्षों की बड़े पैमाने पर कटाई की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर प्रभावी रोक नहीं लगी तो क्षेत्र की हरियाली और पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंच सकती है।

कटान के बाद दूर-दराज तक पहुंचाई जा रही लकड़ी

ग्रामीणों के अनुसार कटान के बाद लकड़ी को स्थानीय स्तर पर एकत्र कर गोरखपुर जनपद के विभिन्न क्षेत्रों के साथ-साथ आसपास के सीमावर्ती जनपदों तक पहुंचाया जाता है। लोगों का दावा है कि यह कारोबार लंबे समय से सुनियोजित तरीके से संचालित हो रहा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

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संरक्षण मिलने की चर्चा, आधिकारिक पुष्टि नहीं

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स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस अवैध कारोबार को संरक्षण देने के लिए संबंधित विभागों और प्रशासनिक तंत्र तक धन पहुंचाए जाने की चर्चा क्षेत्र में आम है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही संबंधित विभागों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।

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पर्यावरण पर मंडरा रहा गंभीर खतरा

पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि लगातार हो रही हरे पेड़ों की कटाई से वन संपदा, जैव विविधता, भूजल संरक्षण और स्थानीय जलवायु पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उनका कहना है कि पीपल, बरगद और पाकड़ जैसे वृक्ष पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए इनके संरक्षण के लिए कठोर कदम उठाए जाने चाहिए।

ग्रामीण बोले— रातों-रात साफ हो रहे बाग और जंगल

ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र के कुछ लकड़ी कारोबारी रातों-रात बागों और जंगलों को साफ कर देने की क्षमता रखते हैं, जिससे लोगों में भय और नाराजगी है। स्थानीय नागरिकों ने वन विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, अवैध कटान में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की है।

वन विभाग ने दिया जांच का भरोसा

वन क्षेत्राधिकारी सर्वजीत सिंह ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में हरे पेड़ों के अवैध कटान की पुष्टि होती है तो इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और नियमानुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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