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गन्ना नियंत्रण आदेश 1966 में संशोधन वापस लो
किसानों के गन्ना को चीनी मिलों तक पहुंचाने का आर्थिक भार मिलों को दिया जाए
पटना। बिहार राज्य ईख उत्पादक संघ के महासचिव प्रभुराज नारायण राव ने गन्ना नियंत्रण आदेश 1966 में भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा सार्वजनिक विभाग कृषि भवन,नई दिल्ली लाए गए संशोधन बिल 2026 चीनी मिल मालिकों तथा कॉर्पोरेट को राहत देने तथा गन्ना किसानों को और लूटने का मौका देना है। उन्होंने बताया कि 25 किलो मीटर की दूरी पर चीनी मिलों को लगाने का मतलब किसानों पर आर्थिक बोझ लादने तथा चीनी मिलों के रिजर्व क्षेत्र को बढ़ा कर किसानों को लूटने की योजना है।आज गन्ने की खेती लगातार घाटे की खेती बनती जा रही है।किसानों को मिलने वाले अनुदानों में लगातार कटौती होती जा रही है।चीनी मिलों द्वारा किसानों को मिलने वाले खाद,बीज से अनुदान हटाने और महंगी कीट नाशक दवाओं के शर्त पर खाद, बीज के माध्यम से किसानों को लूटा जा रहा है। बन्द पड़े चीनी मिलों पर किसानों का भारी बकाया है।जिसे किसानों को दिलाने के लिए सरकार द्वारा कोई पहल नहीं किया जा रहा है।जबकि शुगर कंट्रोल एक्ट 1966 के आदेश के द्वारा 14% ब्याज के साथ गन्ना किसानों को पैसा देना है।
बिहार सरकार द्वारा अधिग्रहीत चीनी मिलों को चालू करने की पूरी जवाबदेही थी।किसानों के बकाए राशि का भुगतान करने की भी जवाबदेही थी।किसानों के गन्ने की पेराई और नियमित भुगतान करने की भी जवाबदेही थी।लेकिन बिहार सरकार अपनी जवाबदेहियों से मुकरती रही है। उन्होंने कहा कि आज बिहार में 29 चीनी मिलों में से मात्र 9 चीनी मिलें चल रही है।शेष 20 चीनी मिलें बंद पड़े हैं।जिस पर किसानों का 364 करोड़ रुपए बकाया है।किसानों के बकाए राशि के भुगतान के लिए बिहार सरकार कभी भी कोई प्रयास नहीं किया है।बिहार के 11 जिलों में पहले गन्ना की खेती होती थी।इस नगदी फसल से किसानों को लाभ मिलता था। लेकिन आज गन्ने की खेती 5 जिलों में सिमट कर रह गई है। 2025 के विधान सभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रथम कैबिनेट की बैठक में 9 बंद पड़े चीनी मिलों तथा 25 नए चीनी मिलों को चालू करने का निर्णय लिया था।लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।तब तक भाजपा के सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार बन गई।इस तरह वह फैसले अधर में लटके हुए हैं।
उन्होंने बिहार सरकार से मांग किया कि
1. किसानों के गन्ना को चीनी मिलों तक पहुंचाने का आर्थिक भार मिलों को दिया जाए।
2. गन्ने की कटाई और ढुलाई की जवाबदेही भी चीनी मिलों का हो।
3. चीनी मिलों द्वारा हो रहे घटतौली पर चीनी मिलों पर मुकदमा कर जेल दिया जाए।
4. नई चीनी मिलों को सहकारिता के माध्यम से खोला जाए।
5. गन्ना का मूल्य 550 रुपए प्रति क्विंटल किया जाए।
6. गन्ना से चीनी निकलने के बाद उसके वायो प्रोडक्ट के मुनाफे का आधा हिस्सा गन्ना किसानों को दिया जाए।
7. बंद पड़े सभी चीनी मिलों सहित प्रस्तावित नए चीनी मिलों को चालू किया जाए।


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