बर्दिया (चोपन) में खनन ब्लास्टिंग से संस्कार भवन में पड़ी दरारें, माँ काली मंदिर व आसपास की बस्तियों पर मंडराया खतरा

नगर पंचायत की आख्या से बढ़ी चिंता, तकनीकी जांच की मांग तेज

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राजेश तिवारी ( ब्यूरो) 

सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश-

नगर पंचायत चोपन द्वारा जिलाधिकारी सोनभद्र को भेजी गई आधिकारिक आख्या के बाद माँ काली मंदिर परिसर से सटे सामुदायिक “संस्कार भवन” की जर्जर स्थिति को लेकर क्षेत्र में चिंता गहरा गई है। समाजसेवी संजय जैन द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र के बाद सामने आई रिपोर्ट में भवन की छत में कई स्थानों पर दरारें तथा पानी टपकने की समस्या की पुष्टि हुई है। नगर पंचायत के अनुसार यह भवन वर्ष 2018 से बंद पड़ा है।

जानकारी के अनुसार नगर के एकमात्र संस्कार भवन का निर्माण लाखों रुपये की लागत से कराया गया था, लेकिन कुछ ही वर्षों में भवन जर्जर घोषित कर बंद कर दिया गया। इस मामले में समाजसेवी संजय जैन ने शिकायत संख्या 20020026002690 के माध्यम से जिलाधिकारी से जांच की मांग की थी, जिसके क्रम में नगर पंचायत चोपन द्वारा आख्या प्रस्तुत की गई।

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नगर पंचायत की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि बर्दिया गांव क्षेत्र में पहाड़ पर हो रही ब्लास्टिंग के कारण भवन की छत क्षतिग्रस्त हुई। किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए भवन की बुकिंग भी रोक दी गई थी। मामले की तकनीकी जांच हेतु लोक निर्माण विभाग (PWD) से निरीक्षण कराया गया, जिसमें भवन की छत में गंभीर क्षति पाए जाने की पुष्टि हुई।

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आसपास की आबादी और धार्मिक स्थल पर खतरे की आशंका; संस्कार भवन के आसपास घनी आबादी निवास करती है। क्षेत्र में माँ काली मंदिर, डिग्री कॉलेज, प्राथमिक विद्यालय एवं कई बस्तियां स्थित हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि लगातार ब्लास्टिंग और कंपन के कारण संस्कार भवन में दरारें आई हैं, तो आसपास की अन्य इमारतें और धार्मिक स्थल भी खतरे की जद में हो सकते हैं।

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नगर पंचायत पर उठे सवाल; नगर पंचायत ने भवन की खराब स्थिति स्वीकार तो की है, लेकिन कई अहम सवाल अब भी अनुत्तरित हैं।भवन क्षति के लिए जिम्मेदार कौन है? ब्लास्टिंग के प्रभाव की स्वतंत्र तकनीकी जांच क्यों नहीं कराई गई।वर्ष 2017-18 से भवन बंद होने के बावजूद स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला गया।केवल छत की मरम्मत होगी या पूरी इमारत की संरचनात्मक जांच कर पुनर्निर्माण कराया जाएगा?

जनसुरक्षा बनाम खनन का मुद्दा; अब यह मामला केवल एक भवन तक सीमित नहीं रह गया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह पूरे क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है। लोगों ने मांग की है कि क्षेत्र की विस्तृत तकनीकी जांच कराई जाए, ब्लास्टिंग से होने वाले कंपन का वैज्ञानिक मूल्यांकन हो, मंदिर, स्कूल और आसपास की बस्तियों की सुरक्षा जांच की जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर ब्लास्टिंग गतिविधियों पर रोक लगाई जाए।

प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर; नगर पंचायत ने बताया है कि मरम्मत कार्य को बोर्ड प्रस्ताव में पारित कर निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जल्द ही कार्य प्रारंभ कराया जाएगा। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल मरम्मत नहीं बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में समय रहते ठोस कार्रवाई करता है या नहीं।

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