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आर्या.एजी के को-फाउंडर प्रयागराज के आनंद चंद्र ने किया एसएचजी वीमेन लीडरशिप प्रोग्राम का नेतृत्व
लगभग 50 वीमेन लीडर्स को बदलाव लाने के लिए साइको सोशल स्किल्स, डिजिटल टूल्स और आजीविका से जुड़ी क्षमताओं की ट्रेनिंग दी गई
दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट
ब्यूरो प्रयागराज। सामुदायिक जुड़ाव की भावना से प्रेरित एक महत्वपूर्ण पहल के तहत, प्रयागराज में जन्मे आर्या.एजी के को-फाउंडर और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर आनंद चंद्र ने अपने गृह नगर में ग्रामीण महिलाओं के लिए लीडरशिप और साइकोसोशल ट्रेनिंग प्रोग्राम का संचालन किया। इस अवसर पर उनके माता-पिता भी उनके साथ मौजूद रहे, जिन्होंने स्थानीय समुदाय को सशक्त बनाने के इस संकल्प में भागीदारी निभाई।
यह 15 दिवसीय क्षमता-निर्माण कार्यक्रम, जिसे ब्रिज4चेंज फाउंडेशन द्वारा आर्याधन फाउंडेशन फॉर इक्विटेबल एग्रीकल्चर (आर्या.एजी की सीएसआर इकाई) के सहयोग से आयोजित किया गया, प्रयागराज के विभिन्न जिलों की स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं में नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास विकसित करने पर केंद्रित था।

इस पहल का नेतृत्व कर रहे आर्या.एजी के चीफ सस्टेनेबिलिटी ऑफिसर शेनॉय मैथ्यू ने कहा, "हम उन पहलों का समर्थन करते हैं जो ग्रामीण नेतृत्व और सामुदायिक मजबूती को सशक्त बनाती हैं। अपने सीएसआर प्रयासों के माध्यम से महिला नेताओं में निवेश करना हमारे समावेशी विकास के दृष्टिकोण के अनुरूप है और यह भारतीय कृषि में महिलाओं की भूमिका को मजदूरी से नेतृत्व तक ले जाने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।"
इस कार्यक्रम में 50 एसएचजी वीमेन लीडर्स को ट्रेनिंग दी गई, जिन्हें सामाजिक बदलाव के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और अपने समुदाय को संगठित करने की क्षमता के आधार पर चुना गया था। लीडरशिप डेवलपमेंट, साइको सोशल सपोर्ट स्किल्स और प्रैक्टिकल डिजिटल टूल्स के माध्यम से यह पहल जमीनी स्तर पर बदलाव लाने वाली आदर्श महिला नेताओं का एक मजबूत नेटवर्क तैयार करने का लक्ष्य रखती है।
ब्रिज4चेंज फाउंडेशन के डायरेक्टर आशीष अग्रवाल ने कहा, "जब महिलाओं को नेतृत्व के लिए सशक्त बनाया जाता है, तो वे दूसरों के लिए प्रेरणादायक आदर्श बन जाती हैं। हमारा प्रयास आत्मविश्वास से भरी एसएचजी लीडर्स का एक ऐसा नेटवर्क तैयार करना है, जो समुदाय स्तर पर मार्गदर्शन दे सके, सहयोग कर सके और सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित कर सके।"
आनंद चंद्र के लिए प्रयागराज में इस कार्यक्रम का संचालन करना गहरा व्यक्तिगत महत्व रखता है। अपने माता-पिता के साथ उनकी भागीदारी उस समुदाय को लौटाने की उनकी मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसने उनके शुरुआती जीवन को आकार दिया। उनकी उपस्थिति ने स्थानीय नेतृत्व और समुदाय द्वारा संचालित बदलाव के महत्व को और भी मजबूत किया।
प्रतिभागियों को स्ट्रेस मैनेजमेंट, बजट बनाना, लक्ष्य निर्धारण, साइबर सुरक्षा और डिजिटल साक्षरता की ट्रेनिंग दी गई, जिससे उनमें वित्तीय आत्मविश्वास और डिजिटल भागीदारी बढ़ी। सत्रों में सजग उपभोग, मासिक धर्म स्वच्छता, कम्युनिकेशन, लैंगिक अधिकार और सामुदायिक सहयोग जैसे विषय भी शामिल रहे। इन पहलुओं ने सतत आजीविका, बेहतर स्वास्थ्य और मजबूत सामाजिक नेटवर्क को बढ़ावा देने में मदद की।
आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता, आर्थिक स्वतंत्रता और सामुदायिक भागीदारी को मजबूत बनाकर यह पहल एसएचजी की महिला लीडर्स को सक्षम बनाती है, ताकि वे अपने साथियों का सहयोग कर सकें, आजीविका को बेहतर बना सकें और जमीनी स्तर पर सामाजिक कल्याण के लिए आवाज उठा सकें।
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