खजनी (गोरखपुर): शंकराचार्य पर दर्ज मुकदमा ‘साजिशन’, कानून की नजर में निराधार – सत्य प्रकाश श्रीवास्तव, एडवोकेट
शंकराचार्य और हिंदू सनातन धर्म को बादनाम करने के लिए मुकदमा दर्ज कराया गया
रिपोर्टर/ रामअशीष त्रिपाठी
खजनी/गोरखपुर : शिव अवतारी जगतगुरु शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद जी महाराज से जुड़े प्रकरण ने तूल पकड़ लिया है। अधिवक्ता सत्य प्रकाश श्रीवास्तव ने पूरे मामले को सुनियोजित साजिश बताते हुए कहा है कि यह कदम शंकराचार्य और हिंदू सनातन धर्म को बदनाम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
स्नान से रोकने के बाद बढ़ा विवाद
जानकारी के अनुसार 18 जनवरी 2026 को प्रयागराज में गंगा स्नान के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए जगतगुरु शंकराचार्य को स्नान से रोक दिया था। श्रीवास्तव का कहना है कि उसी दिन देश-विदेश की मीडिया और स्थानीय प्रशासन की मौजूदगी में उन पर गंभीर आरोप लगाए गए, जो प्रथम दृष्टया असंगत प्रतीत होते हैं। उनका दावा है कि जिस समय की घटना बताई जा रही है, उस समय पुलिस स्वयं शंकराचार्य को अपने संरक्षण में रखे हुए थी।
‘हिस्ट्रीशीटर’ की याचिका पर मुकदमा दर्ज
अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट के आदेश पर जिस व्यक्ति की प्रार्थना पत्र पर मुकदमा दर्ज किया गया, वह स्वयं कई आपराधिक मामलों में आरोपी बताया जा रहा है और थाने का हिस्ट्रीशीटर है। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति के आरोपों के आधार पर देश के प्रमुख सनातन पीठाधीश्वर पर मुकदमा दर्ज होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
कानूनी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
श्रीवास्तव ने कहा कि हत्या, डकैती या बलात्कार जैसे गंभीर आरोपों में सामान्यतः पुलिस तत्काल मुकदमा दर्ज कर मेडिकल परीक्षण कराती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। यदि न्यायालय को आदेश देकर मुकदमा दर्ज कराना पड़ा, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उनका कहना है कि यदि आरोप इतने गंभीर थे, तो स्थानीय पुलिस ने तत्परता क्यों नहीं दिखाई?
स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग
अधिवक्ता ने पूरे प्रकरण की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि आरोप असत्य और साजिशन पाए जाते हैं, तो शिकायतकर्ता के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय पुलिस पर आमजन का विश्वास कमजोर हुआ है, इसलिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
सत्य प्रकाश श्रीवास्तव, एडवोकेट (गोरखपुर), ने कहा कि हिंदू समाज इस प्रकार के आरोपों को स्वीकार नहीं करेगा और सच्चाई सामने लाने के लिए कानूनी लड़ाई जारी

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