मुख्यमंत्री के  आदेश बेअसर,  भू माफियाओं  के आगे नत मस्तक  तहसील प्रशासन, सैकड़ों एकड़ भूमि  पर अवैध  कब्जेदारो की   लह लहा रहीं फसले  

हर दुआ  में तालाब पर  बना  श्री राम  का पक्का  मकान, तो जटपुरा  में खेल मैदान  पर बैन गए पक्के मकान  और दुकान  मुड़ा बुजुर्ग  में खलिहान की जमीन  और खेल मैदान पर  खड़ी  लाखों की  फसल 

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लखीमपुर खीरी-  भले ही  सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर  योगी आदित्य नाथ  भू माफियाओं को  24 घंटे में जमीनों पर से अवैध कब्जा हटाने की  नसीहत  दे रहे  हों  और कब्जा न छोड़ने पर  इससे अर्जित की गई सम्पत्ति  व धनराशि  ज़ब्त करने के  फरमान  सुना रहे  हो  । इनके फरमानौ का  लैसमात्र  असर  भू माफियाओं  पर प़डता  नजर नहीं  आ रहा है।और  न ही  जरा सा भी  खौफ ही दिखाई  प़ड रहा हैं।इसका  सीधा सा  कारण  तहसील प्रशासन  और राजस्व विभाग के अधिकारियों का मिल रहा खुला संरक्षण  बताया जाता है।
 
गौर  करने वाली बात तो यह है  कि  जब सरकार से भरी भरकम  वेतन  ,नौकर, और गाड़ी , बंगला , सहित  तमाम सुख सुविधा  मिलने के बाद भी  उनका  पेट शायद  नहीं भरता है  और चंद  गांधी छपे  काग़ज़ के टुकडो  की खातिर  भू माफियाओं  के  यहां  हाजरी  लगाते  देखे जा रहे हैं।और अपनी ही सरकार  के ताबूत  में कील ठोकने  का काम करते रहेंगे  तो फिर  कैसे  अवैध कब्जा मुक्त हो पाएँगी सरकारी जमीनें।सूत्र बताते हैं कि  जब से तहसील दार  भीमचंद  गोला तहसील   में  ट्रांसफर  होकर आए हैं  तब से तहसील गोला में  अवैध कब्जों की  बाढ़ सी आ गई है।
 
तहसील दार   गोला पर भू माफियाओं  को संरक्षण  देने और इसके बदले  मोटी कमाई किए जाने के  गंभीर  आरोप लगाये जा रहे हैं।यह सहाब लखीमपुर  तहसील में अपनी तैनाती के दौरान  काफी सरकारी  ज मन  पर कब्जा कराया था  अपनी  काली कमाई वाली करतूतों  के लिए खासा जाने पहचाने जाते हैं।जब से सहाब गोला तहसील में ट्रांसफर होकर आए हैं  तब से एक भी सरकारी जमीन  कहीं सुरक्षित नहीं बच  पाई है।
 
लोग बताते हैं कि  तहसीलदार  पहले तो  तहसील दार  अपने चहेते इन्हीं  भू माफियाओं पर कार्रवाई नहीं करते  बस जांच के नाम पर लेखपाल भेजकर  अवैध कब्ज़ा दारो.से  सेटिंग  कर  जेब गरम कर  लेते है और उनको अवैध कब्जा की खुली छूट दे दी जाती हैं  और जब कभी  मामला ज्यादा अखबारी सुर्खिया बना  तो पहले  पत्रकार को बुलाकर  छोटा सा टुकड़ा डालकर शांत कर दिया जाता  है।
 
जब उससे भी काम नहीं चलता है तो फिर साहब  अपना तरीका  निकालते हैं।तुरंत नोटिस जारी  कर दी जाती हैं और भू माफियाओं को समझा दिया जाता है  कि होगा कुछ भी नहीं  जो हम है   नोटिस तो गुमराह करने का बहाना  है   78 एकड  जमीन पर अवैध कब्जा मामले में डेढ़ साल पहले से  नोटिस भेजी  गई  आजतक कुछ नहीं  हुआ।अवैध कब्जे धारक आज भी अपनी  जेबे भारी करने में लगे  देखे जा सकते हैं।नियमानुसार तो फसल को  कटवाकर ग्राम पंचायत कोश  में जमा कारवाई  जानी चाहिए।
 
अवैध कब्जे दारो को फसल काटने  से रोका जाना चाहिए ।इस  मामले में  मितौली  यस  डी. एम  ने साहसिक कदम उठाते हुए  पूरी फसल कटवाकर  ग्राम पंचायत के खाते में जमा करा दिया था और  कब्जा मुक्त जमीन को भी करवा दिया था। लकिन गोला तहसीलदार  साहब   का मामला ही कुछ और है।  मामले  में समस्त साक्ष्यों को संकलित  करके  शासन  से शिकायत करने के साथ  उच्च न्यायालय  मे  जनहित याचिका दायर कर   सरकारी  जमीनों ,तालाब, खेल मैदान  खलिहान  आदि अन्य सरकारी जमीनों  को कब्जा मुक्त कराए जाने की मांग किए जाने  की बात कही गई है।

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