खाकी की मर्यादा पर सख्त संदेश महिला कांस्टेबल प्रकरण में बस्ती कोतवाल लाइन हाजिर, एसपी यशवीर सिंह की त्वरित कार्रवाई

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बस्ती। बस्ती पुलिस विभाग में अनुशासन और आचरण की मर्यादा को लेकर बस्ती पुलिस अधीक्षक यशवीर सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए लगातार विवादों में घिरे बस्ती कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक दिनेश चन्द्र चौधरी को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया । सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई कोतवाली में तैनात महिला कांस्टेबल मेनका चौहान द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद की गई, जिसमें उन्होंने अवकाश मांगने के दौरान अभद्र व्यवहार, अपमानजनक भाषा और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया हैबताते चलें कि 17 फरवरी 25 को महिला कांस्टेबल मेनका चौहान ने पुलिस अधीक्षक को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उनकी मां की तबीयत खराब होने के कारण उन्होंने अवकाश की मांग की थी।
 
आरोप है कि 17 फरवरी 2026 को करीब 11 बजे जब वह कोतवाली प्रभारी से छुट्टी के लिए निवेदन करने पहुंचीं, तो कोतवाल ने अवकाश देने से इनकार करते हुए उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस दौरान अपमानजनक और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया तथा उन्हें डांटते हुए कार्यालय से बाहर जाने के लिए कहा गया, जिससे उन्हें मानसिक आघात पहुंचा।
 
प्रार्थना पत्र में महिला कांस्टेबल ने यह भी आरोप लगाया है कि कोतवाली प्रभारी द्वारा महिला पुलिस कर्मियों के साथ अनुचित व्यवहार किया जाता है और कर्मचारियों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जाता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि घटना की पूरी गतिविधि कोतवाली परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद है, जिसकी जांच कर सच्चाई का पता लगाया जा सकता है। महिला कांस्टेबल ने मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।
 
मामला सामने आते ही पुलिस अधीक्षक यशवीर सिंह ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई की और कोतवाली प्रभारी निरीक्षक दिनेश चन्द्र चौधरी को लाइन हाजिर कर दिया।पुलिस अधीक्षक द्वारा उठाए गए इस कदम को विभागीय अनुशासन बनाए रखने और महिला पुलिस कर्मियों के सम्मान की रक्षा के लिए उठाया गया सख्त और स्पष्ट संदेश माना जा रहा है।सूत्रों के अनुसार, इस कार्रवाई के बाद पूरे पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है और विभागीय स्तर पर स्पष्ट संकेत गया है कि पुलिस विभाग में आचरणहीनता और अनुशासनहीनता किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी।
 
वरिष्ठ अधिकारियों ने भी संकेत दिया है कि मामले की जांच के आधार पर आगे आवश्यक विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस अधीक्षक द्वारा की गई इस कार्यवाही से स्पष्ट चेतावनी नजर आ रही है जहां यह माना गया कि खाकी की गरिमा सर्वोपरि है और विभाग में तैनात किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा अनुशासन और आचरण के नियमों का उल्लंघन किए जाने पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस कार्रवाई को पुलिस विभाग में जवाबदेही, पारदर्शिता और अनुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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