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लोकसभा में खुलासा: 10 साल में जजों के खिलाफ 8,360 शिकायतें, कार्रवाई पर चुप्पी
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने संसद में बताया है कि पिछले दस वर्षों में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के कार्यालय को मौजूदा जजों के खिलाफ कुल 8,360 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। यह जानकारी शुक्रवार को लोकसभा में दी गई।
केंद्रीय कानून मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2016 से 2025 के बीच ये शिकायतें दर्ज की गईं। यह आंकड़ा Supreme Court of India से प्राप्त डेटा के आधार पर साझा किया गया।
सांसद मथेश्वरन के सवाल पर जवाब
यह जानकारी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के सांसद M. Matheshwaran के प्रश्न के उत्तर में दी गई। उन्होंने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ भ्रष्टाचार, यौन दुर्व्यवहार और अन्य गंभीर अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतों की सूची मांगी थी।
कानून एवं न्याय राज्य मंत्री Arjun Ram Meghwal ने लोकसभा में जवाब देते हुए बताया कि कुल 8,360 शिकायतें प्राप्त हुईं, लेकिन इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई, इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई।
कार्रवाई और रिकॉर्ड पर अस्पष्टता
सांसद ने यह भी पूछा था कि क्या इन शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई की गई और क्या उनका कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड या डेटाबेस तैयार किया गया है। हालांकि, मंत्रालय की ओर से इस पहलू पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। यह भी नहीं बताया गया कि शिकायतों पर हुई कार्रवाई का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड क्यों उपलब्ध नहीं है।
शिकायतों की प्रक्रिया क्या है?
सरकार ने अपने जवाब में कहा कि भारत के चीफ जस्टिस और संबंधित हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ‘इन-हाउस प्रोसीजर’ के तहत जजों के खिलाफ शिकायतें प्राप्त करने और उन पर विचार करने के लिए अधिकृत हैं।
Read More थाना हरैया कस्बा बना नशा कारोवरी का अड्डा मिली भगत से बिक रहा है गंजा स्मैक पुलिस को मिल रही विटामिनइसके अलावा, हायर ज्यूडिशियरी के सदस्यों के खिलाफ सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रिवांस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CPGRAMS) या अन्य माध्यमों से प्राप्त शिकायतें CJI या संबंधित हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को भेज दी जाती हैं।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि क्या सरकार भविष्य में उच्च न्यायपालिका के खिलाफ शिकायतों की व्यवस्थित रिकॉर्डिंग, मॉनिटरिंग और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कोई नई गाइडलाइन या नीति लाने पर विचार कर रही है। इस खुलासे के बाद न्यायपालिका की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस तेज होने की संभावना है।

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