अधीक्षक ड्यूटी से गायब, फार्मासिस्ट ने ओपीडी के मरीजों का किया इलाज

सीएचसी दुबौलिया पर तैनात हैं दो डाक्टर , अक्सर दोनों डॉक्टर ड्यूटी से रहते हैं गायब फार्मासिस्ट व वार्ड ब्वॉय के सहारे संचालित हो रही स्वास्थ्य सेवाएंसीएमओ साहब आखिर कब सुधरेगी सीएचसी दुबौलिया व सभी उप स्वास्थ्य केन्द्रों की व्यवस्था 

Swatantra Prabhat UP Picture
Published On

बस्ती। बस्ती जिले के दुबौलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सरैया अतिबल)दुबौलिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं। अधीक्षक डॉ. सुशील कुमार और एमओ राजबीर सिंह ड्यूटी से अक्सर गायब रहते हैं और अधीक्षक और एमओ के ड्यूटी से गायब होने की वजह से फार्मासिस्ट ने डॉक्टर की कमान संभाल ली है। फार्मासिस्ट मरीजों को गुमराह कर सरकारी पर्ची पर उल्टी-सीधी दवा लिख रहा है जिससे मरीजों के जिंदगी के साथ खिलवाड़ हो रहा है यदि किसी मरीज के साथ कोई अप्रिय घटना घटित हो जाएं तो कौन जिम्मेदार होगा ? 
 
सूत्रों की माने तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुबौलिया पर दो डॉक्टरों की तैनाती है जिसमें एक डॉक्टर अधीक्षक डा० सुशील कुमार है और दूसरा डाक्टर एमओ राजवीर सिंह है लेकिन दोनों डॉक्टर कभी भी एक साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर उपस्थित नहीं रहते हैं । 03 दिन ओपीडी के मरीजों को अधीक्षक देखते हैं और 03 दिन एमओ ओपीडी के मरीजों को देखते हैं एवं कभी-कभी दोनों लोग ड्यूटी से गायब रहते हैं । अधीक्षक और एमओ की अनुपस्थिति में फार्मासिस्ट ओपीडी के मरीजों को देखते है । इस प्रकार स्पष्ट है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुबौलिया की स्वास्थ्य व्यवस्था चौपट हो चुकी है लेकिन किसी भी जिम्मेदार अधिकारियों को चिन्ता नही है ।
 
मीडिया टीम ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुबौलिया का पड़ताल किया तो पता चला कि चिकित्सा अधिकारी कक्ष में फार्मासिस्ट डॉक्टर की कुर्सी पर बैठकर सरकारी पर्चे पर ओपीडी में मरीजों को दवा लिख रहा है । मरीजों को पता ही नहीं है कि जिससे हम इलाज कर रहे हैं वह डॉक्टर है या फार्मासिस्ट ।
 
ओपीडी में मरीजों को देखने वाले फार्मासिस्ट ने बातचीत में बताया कि वर्तमान समय में कोई डॉक्टर अस्पताल पर उपलब्ध नहीं है इसीलिए ओपीडी के मरीजों का इलाज कर रहा है । सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुबौलिया के अंतर्गत उप स्वास्थ्य केंद्रों का ही यही हाल है कि अक्सर उप स्वास्थ्य केंद्र पर ता लटकता रहता है और सीएचओ ड्यूटी से गायब रहते हैं लेकिन अधीक्षक को इसकी कोई परवाह नहीं रहता है ।
 
इस प्रकार हम कर सकते हैं कि अधीक्षक डॉक्टर सुशील कुमार का मुख्य उद्देश्य अपना काम बनता तो भाड़ में जाए जनता की नीति पर कार्य करते हैं । अधीक्षक, एमओ और सीएमओ के मनमानी कार्यों से प्रदेश सरकार की मंशा पर पानी फिर रहा है।इस मामले में सीएमओ डा० राजीव निगम से फोन के माध्यम से जानकारी लेने की कोशिश की लेकिन उन्होंने मीडिया के फोन को रिसीव नहीं किया

About The Author

Post Comments

Comments

संबंधित खबरें

नवीनतम समाचार