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बटुकों के अपमान पर बीजेपी में ही रार! डिप्टी CM ने किया सम्मान तो अखिलेश ने कसा तंज
अखिलेश यादव ने कसा तंज सीएम और डिप्टी सीएम के बयान में फर्क भाजपा विधायक ने अधिकारियों पर लगाए आरोप
प्रयागराज में बटुकों के अपमान और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। इस मुद्दे पर अब भारतीय जनता पार्टी के भीतर ही मतभेद खुलकर सामने आते दिख रहे हैं। एक ओर योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज प्रशासन की कार्रवाई को सही ठहराया, वहीं दूसरी ओर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बटुकों की शिखा पकड़ने की घटना को “महापाप” बताया है।
अखिलेश यादव ने कसा तंज
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के बयान पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा:
“भूतपूर्व मुख्यमंत्री को अस्वीकारते हैं, वर्तमान मुख्यमंत्री को नहीं मानते हैं, उप होकर भी अपना राग अलापते हैं, मंत्रालय की ज़िम्मेदारियों से भागते हैं, लगता है वो जानेवाले हैं ये जानते हैं!”
अखिलेश के इस बयान को भाजपा के अंदरूनी मतभेद पर तंज के तौर पर देखा जा रहा है।
सीएम और डिप्टी सीएम के बयान में फर्क
विधानसभा सत्र के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता और कानून से ऊपर कोई नहीं है। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई को नियमों के तहत बताया।
इसके उलट डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि बटुकों की शिखा पकड़ना धार्मिक आस्था का अपमान है और ऐसा करने वालों को पाप लगेगा। उनके बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई।
भाजपा विधायक ने अधिकारियों पर लगाए आरोप
लोनी से भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने भी प्रशासनिक अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि शंकराचार्य और बटुकों के साथ हुई घटना के लिए अधिकारी जिम्मेदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी विपक्ष के एजेंडे पर काम कर रहे हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
101 बटुकों का किया सम्मान
19 फरवरी को डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के सरकारी आवास पर 101 बटुक पहुंचे। इस दौरान पाठक ने बटुकों का फूल-माला पहनाकर स्वागत किया, तिलक लगाया और उनकी शिखा का सम्मान करते हुए आशीर्वाद लिया।
मौनी अमावस्या पर क्या हुआ था?
मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिष्यों के साथ स्नान के लिए जा रहे थे। प्रशासन ने उन्हें पालकी से जाने से रोका, जिस पर विवाद हो गया।
इस दौरान पुलिस और शिष्यों के बीच धक्का-मुक्की हुई। घटना के कुछ वीडियो भी सामने आए, जिनमें पुलिसकर्मी बटुकों के साथ मारपीट करते नजर आए।
यह विवाद अब धार्मिक और राजनीतिक मुद्दा बन चुका है और इसे लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

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