महाराष्ट्र में जनता के जनादेश ने ‘लात मारने’ वालों को करारा सबक सिखाया
महाराष्ट्र में मुंबई सहित सभी 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव परिणामों ने उन राजनीतिक दलों और नेताओं को करारा संदेश दिया है, जो बड़े गुमान में देश के लोगों को बाँटने की राजनीति करते रहे हैं । क्षेत्रीय पार्टी मनसे के प्रमुख राज ठाकरे द्वारा हिंदी भाषी राज्यों के लोगों को “लात मारकर महाराष्ट्र से बाहर करने” जैसे गैर-जिम्मेदाराना बयान से न केवल हिंदी भाषी नागरिकों की भावनाएँ आहत हुईं, बल्कि महाराष्ट्र के मराठी समाज को भी यह बयान नागवार गुज़रा ।
आज देश के नागरिकों के लिए राष्ट्र प्रथम और उसकी सुरक्षा सर्वोपरि है। यही कारण है कि वर्तमान राजनीति में वही दल और नेता जनता का विश्वास जीत पा रहे हैं, जो राष्ट्रहित और विकास के मुद्दों पर काम कर रहे हैं। महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति में भाजपा ने अपने दम पर नया इतिहास रचा है। पहली बार क्षेत्रीय दलों को पीछे छोड़ते हुए भाजपा को सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनाने का जनादेश मिलना, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और राज्य की देवेंद्र फड़नवीस सरकार की साफ नीयत और विकासोन्मुखी राजनीति का परिणाम है ।
महाराष्ट्र के इन स्थानीय चुनावों ने उन राजनीतिक दलों के नेताओं को आत्ममंथन का अवसर दिया है, जो आज भी जाति, धर्म और भाषा के सहारे सत्ता के सपने देखते हैं। आज देश का हर नागरिक चाहे वह किसी भी धर्म या वर्ग से हो अपने और अपने देश का विकास चाहता है। अच्छी शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ, मज़बूत कानून व्यवस्था, शांति और सुरक्षा आज आम नागरिक की प्राथमिकताएँ हैं।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की महानगरपालिका, जिसका बजट कई राज्यों के बजट के बराबर है, वहाँ तीन दशक बाद भाजपा का सत्ता में लौटना जनता के सरकार के प्रति बढ़ते विश्वास का प्रतीक है। उम्मीद है कि भाजपा गठबंधन महाराष्ट्र की जनता की अपेक्षाओं और जनादेश की कसौटी पर खरा उतरेगा।
अ

Comment List