असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक होली का पर्व अपना विशेष महत्व रखता है 

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विश्व देव राठौर 
 
बरेली/पौराणिक मान्यताओं के अनुसार होली का पर्व असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक माना जाता है इस पर्व को भगवान विष्णु की तपस्या भक्त प्रहलाद के द्वारा किए जाने पर उसके पिता हिरण्यकश्यप केके विरोध के बाद भी ईश्वर भक्ति नहीं छोड़ी जिसको लेकर उनको तरह-तरह से प्रताड़ित किया गया।
 
अंत में जब कुछ भी ना कर सके तो पिता ने प्रहलाद को अपनी बहन होलिका से उसकी गोद में लेकर जलाने का निर्णय लिया देवताओं के वरदान के अनुसार होलिका को वरदान था के वह आग में नहीं जलेगी परंतु इसका दुरुपयोग करने पर होलिका के प्राप्त किया वरदान भी काम नहीं आया और वह जलकर भस्म हो गई और भक्त प्रहलाद बच गए।
 
 इसलिए होली रंगों और खुशियों का त्यौहार है जो हर वर्ष मनाया जाता है यह त्यौहार फागुन मास में आता है और बसंत ऋतु के आगाज का प्रतीक भी है होली पर लोग एक दूसरे को रंग-बिरंगे गुलाल लगते हैं इसी दिन बच्चे गुब्बारे और पिचकारियों से खेल कर आनंद लेते हैं होली की शुरुआत होलिका दहन से होती है जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है लोग सफेद कपड़े पहनकर नाचते खुशी का इजहार करते हैं घर-घर में गुजिया मिठाई ठंडाई आदि जैसे स्वादिष्ट पकवान भी खुशी में बनाए जाते हैं।
 
होली पर फाग गीत गाए जाते हैं और लोग अपने प्रिय जनों से मिलते हैं यह त्यौहार जीवन में नई उमंग और सकारात्मक जागता है राक्षस कुल में जन्मी होली का भक्त प्रहलाद को जलाकर भस्म करने के उद्देश्य से अगेन समाधि ली परंतु भगवान विष्णु की कृपा से भक्त प्रहलाद बच गए और होली का जलकर राख हो गई इसी क्रम में होली का पर्व कई देशों में बड़े हर्षो उल्लास के साथ मनाया जाता है इसलिए होली का पर्व अपना विशेष महत्व रखता है।

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