यमराज बना अवैध रूप से हॉस्पिटल, छापेमारी के बीच टांके लगी महिलाओं को खेतों में दौड़ाया
संजीवनी सर्जिकल हॉस्पिटल की हैवानियत दो महिलाओं की निकाली बच्चेदानी, पकड़े जाने के डर से मरीजों को बंधक बना खेतों में छुपाया।
अजित सिंह / राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट)
जनपद के बभनी मुख्य बाजार में स्थित संजीवनी सर्जिकल हॉस्पिटल में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ अवैध रूप से संचालित हो रहे नर्सिंग होम में दो महिलाओं की असुरक्षित तरीके से बच्चेदानी (गर्भाशय) निकाल दी गई। स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी के दौरान जो मंजर दिखा, उसने डॉक्टर के पेशे को कलंकित कर दिया है।

शनिवार शाम करीब 5 बजे जब सह-नोडल अधिकारी गुरु प्रसाद के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल पर छापा मारा, तो हड़कंप मच गया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पकड़े जाने के डर से अस्पताल संचालक ने ऑपरेशन के बाद तड़प रही दो महिलाओं को कमरे में बाहर से ताला लगाकर बंद कर दिया और खुद फरार हो गया। घंटों तक मरीज दर्द से कराहते रहे, लेकिन उन्हें मदद नहीं मिली।

अस्पताल संचालक की क्रूरता यहीं नहीं रुकी। छापेमारी से बचने के लिए करीब एक घंटे बाद पीछे के रास्ते से ऑपरेशन की गई महिलाओं को पैदल ही खेतों की ओर ले जाया गया। टांके लगी अवस्था में महिलाओं को खेतों में दौड़ाया गया और वहाँ बैठाकर छुपा दिया गया। इसके बाद बिना नंबर प्लेट की गाड़ी में जबरन लादकर उन्हें दूसरे निजी अस्पताल भेज दिया गया। पीड़ित महिलाओं में बुधनी (छत्तीसगढ़) और उर्मिला (बचरा गांव) शामिल हैं।
हैरानी की बात यह रही कि कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों पर संचालक ने अपनी 'ऊंची पहुंच' का हवाला देते हुए धौंस जमाई और उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। मौके पर मौजूद सह-नोडल अधिकारी मूकदर्शक बने रहे, जिससे उनकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। संचालक ने खुलेआम चुनौती देते हुए कहा कि अधिकारी मेरा कुछ नहीं उखाड़ पाएंगे। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार बभनी बाजार में सक्रिय दलालों का एक गिरोह गरीब और अनपढ़ महिलाओं को बहला-फुसलाकर यहाँ लाता है, जहाँ बिना विशेषज्ञ डॉक्टरों और बिना मानकों के गर्भाशय निकालने और अवैध गर्भपात जैसे खतरनाक काम किए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अस्पताल मरीजों के लिए काल बन चुका है। मामले पर सह-नोडल अधिकारी गुरु प्रसाद ने औपचारिक बयान देते हुए कहा कि अस्पताल को नोटिस जारी कर दिया गया है। हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या केवल नोटिस देना ही पर्याप्त है? मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करने वाले और अधिकारियों को चुनौती देने वाले संचालक पर कठोर कानूनी कार्रवाई (FIR) क्यों नहीं की गई। क्या ऑपरेशन के तुरंत बाद मरीजों को खेतों में दौड़ाना हत्या के प्रयास जैसा नहीं है। बिना रजिस्ट्रेशन और विशेषज्ञ के इतने बड़े ऑपरेशन कैसे हो रहे थे। सबसे बड़ा सवाल प्रशासन एक अवैध अस्पताल संचालक के सामने बेबस क्यों नजर आ रहा है?


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