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झांसी छावनी क्षेत्र में खुले में कचरा डंपिंग का मामला, MRF सेंटर को लेकर नगर निगम–छावनी परिषद आमने-सामने
शिकायतकर्ता नरेंद्र कुशवाहा का कहना है कि विभागों के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा पर्यावरण और बेजुबान पशुओं को भुगतना पड़ रहा है।
स्वतंत्र प्रभात
झांसी
झांसी छावनी क्षेत्र में रिसाला चुंगी से मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) सेंटर तक जाने वाली मुख्य सड़क पर खुले में कचरा डंपिंग का गंभीर मामला सामने आया है। सड़क किनारे प्लास्टिक, पॉलीथीन और अन्य ठोस कचरे के बड़े-बड़े ढेर लगे होने से पर्यावरण प्रदूषण के साथ-साथ बेजुबान पशुओं के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र कुशवाहा ने 1 मार्च 2026 को इस संबंध में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि रिसाला चुंगी से MRF सेंटर तक का मार्ग कचरे के ढेर में तब्दील हो चुका है। उन्होंने कहा कि यहां पड़े प्लास्टिक और जहरीले कचरे को खाकर गाय व अन्य पशु बीमार हो रहे हैं, जो पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 का उल्लंघन है। शिकायत में तत्काल कार्रवाई की मांग की गई थी।
शिकायत पर संज्ञान लेते हुए झांसी छावनी परिषद के मुख्य अधिशासी अधिकारी अभिषेक आजाद ने 7 मार्च को अपनी रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि रिसाला चुंगी के पास रखा गया MRF कंटेनर छावनी परिषद का नहीं बल्कि नगर निगम का है। परिषद ने इस मामले में नगर निगम को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सेना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कच्चे रास्तों की सफाई के लिए परिषद द्वारा 15 दिनों के भीतर सफाई कार्य पूरा कराने का आश्वासन दिया गया है। साथ ही ट्रेंचिंग ग्राउंड का गेट खुला रहने के कारण पशुओं के अंदर प्रवेश करने की बात स्वीकार करते हुए भविष्य में इसे रोकने के लिए सतर्कता बरतने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
शिकायतकर्ता नरेंद्र कुशवाहा का कहना है कि विभागों के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा पर्यावरण और बेजुबान पशुओं को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो मामले को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में ले जाया जाएगा।
स्थानीय लोगों का भी कहना है कि सड़क किनारे कचरे के ढेर से बदबू और गंदगी फैल रही है, जिससे आसपास के क्षेत्र में रहने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब देखना होगा कि नगर निगम और छावनी परिषद इस गंभीर समस्या का समाधान कितनी जल्दी कर पाते हैं।

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