“किशोर संबंधों में अक्सर लड़कों को भुगतने पड़ते हैं परिणाम”।

 पाक्सो  के दुरुपयोग को रोकने के लिए जागरूकता जरूरी — मद्रास हाईकोर्ट।

Swatantra Prabhat Picture
Published On

स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।


मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में एक युवक की दोषसिद्धि को रद्द कर दिया, जिसे निचली अदालत ने आईपीसी की धारा 366 तथा पाक्सो एक्ट, 2012 की धारा 5(l) सहपठित धारा 6 के तहत एक नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप में दोषी ठहराया था।

जस्टिस एन माला ने कहा कि यह मामला दो किशोरों के बीच सहमति से बने संबंध का प्रतीत होता है, जो अंततः माता-पिता के विरोध के कारण विवाद में बदल गया। अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में अक्सर परिणामों का सामना केवल लड़कों को करना पड़ता है।

अदालत ने कहा, “यह एक सामान्य मामला है जिसमें किशोरों के बीच सहमति से बने संबंध का अंत माता-पिता के मतभेद के कारण हुआ। ऐसे मामलों में अक्सर लड़की पर परिवार का दबाव होता है और बाद में उसकी शादी कहीं और करा दी जाती है, जिसके बाद लड़के के खिलाफ पाक्सो  के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज करा दिया जाता है, जिससे उसे लंबी अवधि तक जेल में रहना पड़ता है।”

अदालत ने यह भी कहा कि यदि पाक्सो  अधिनियम की धारा 43 के तहत कानून के प्रावधानों और उसकी कठोरता के बारे में व्यापक जागरूकता फैलाई जाए तो ऐसे मामलों में कमी लाई जा सकती है। न्यायालय ने कहा कि इस कानून के कठोर प्रावधानों की जानकारी के अभाव में इसका दुरुपयोग होने की संभावना बढ़ जाती है।

Kal Ka Mausam: देशभर में कल कैसा रहेगा मौसम? देखें पूर्वानुमान  Read More Kal Ka Mausam: देशभर में कल कैसा रहेगा मौसम? देखें पूर्वानुमान

इसी संदर्भ में अदालत ने तमिलनाडु के चीफ सेक्रेटरी को निर्देश दिया कि वे पाक्सो अधिनियम की धारा 43 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाएं और आम जनता, बच्चों तथा अभिभावकों में कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाएं।

नौकर से मारपीट के मामलें में पूर्व एमएलसी के बेटे-बहू पर मुकदमा दर्ज Read More नौकर से मारपीट के मामलें में पूर्व एमएलसी के बेटे-बहू पर मुकदमा दर्ज

अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि सरकारी और निजी स्कूलों तथा कॉलेजों में जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएं, ताकि कानून और उसके परिणामों के बारे में जानकारी दी जा सके। यह मामला उस अपील से संबंधित था जिसमें आरोपी ने स्पेशल कोर्ट नागरकोइल के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उसे दोषी ठहराया गया था।

यूपी में चुनावी मोड में भाजपा, योगी कैबिनेट reshuffle की अटकलें तेज Read More यूपी में चुनावी मोड में भाजपा, योगी कैबिनेट reshuffle की अटकलें तेज

अभियोजन के अनुसार, घटना के समय लड़की की उम्र 16 वर्ष थी। आरोपी, जो लड़की के भाई का मित्र था, उससे परिचित हुआ और बाद में उससे प्रेम का इज़हार करते हुए विवाह की इच्छा जताई। लड़की ने बताया कि उसके माता-पिता उसकी इच्छा के विरुद्ध शादी कराना चाहते हैं, जिसके बाद आरोपी उसे घर से ले गया और अपने रिश्तेदार के घर में उससे विवाह कर लिया। बाद में जिला बाल संरक्षण अधिकारी को एक गुमनाम कॉल मिलने पर दोनों को हिरासत में लिया गया।

हालांकि अपील में आरोपी ने तर्क दिया कि दोनों के बीच प्रेम संबंध था और लड़की ने स्वेच्छा से उसके साथ जाने का निर्णय लिया था। उसने यह भी कहा कि लड़की के शुरुआती बयानों में उसके खिलाफ कोई आरोप नहीं था और निचली अदालत ने उसके विरोधाभासी बयान पर भरोसा करके गलती की।

अदालत ने पाया कि लड़की की उम्र साबित करने के लिए अभियोजन ने जन्म प्रमाणपत्र और ट्रांसफर सर्टिफिकेट की केवल फोटोकॉपी पेश की थी, जबकि उनके मूल दस्तावेज उपलब्ध थे। 

About The Author

Post Comments

Comments

संबंधित खबरें