जैविक खेती से मिट्टी में उर्वरा शक्ति बनी रहती हैं: राजाराम

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सिद्धार्थनगर । बांसी ब्लाक के ग्राम जिगनिहवा में गुरुवार को कृषि विभाग द्वारा आत्मा योजन के तहत ग्राम स्तरीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें जैविक खेती पर आधारित रहा। ए, डी, ओ, कृषि राजाराम यादव ट्रेनर द्वारा जैविक खेती  को एक पारिस्थितिकी खेती का तरीका बताया जैविक खेती से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और पर्यावरण भी  संतुलित रहता है। जैविक खेती में जैविक मूल के उर्वरकों जैसे कंपोस्ट खाद हरी खाद और हड्डी के चूर्ण का इस्तेमाल किया जाता है। प्राकृतिक प्रक्रियाओं जो जैव विविधता स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक काम किया जाता है।
 
जैविक खेती से खरपतवार रोग और कीटों का नियंत्रण होता है। जैविक खेती से मिट्टी के सूक्ष्मजीवो की क्रिया से फसल को पोषक तत्व मिलते हैं। मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता बनी रहती है। उत्तर प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने की जरूरत है। रासायनिक उर्वरकों के दाम किसानों के लिए संकट उत्पन्न कर रहे हैं ।किसानों को प्राचीन कृषि पद्धतियों को अपनाना चाहिए।
 
जैविक उर्वरक का प्रयोग ढांचा, सनई और दलहन  फसलों की खेती कर मिट्टी को स्वस्थ और उपजाऊ बनाना चाहिए सरकार किसानों को दलहन ,सनई, ढैचा के बीज सस्ती दरों पर नैडप कंपोस्ट खाद बनाने के लिए किसानों को जमीनी कार्य करना चाहिए । इस दौरान क्षेत्र के नागेंद्र, अंगद, अलगू, जैसराम, वचन, जोखन, रामायन, लक्ष्मी प्रसाद , जयकरन, नंदलाल, धर्मेंद्र, मिठाई,राम सवारे ,संतोष,कविता, नीलम, प्रभावती आदि सैकड़ो की संख्या में लोग मौजूद रहे।

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