सोनभद्र ओबरा प्लांट-सी की जाँची गई जमीनी हकीकत, जांच समिति ने दिए उत्पादन और सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश
कर्मचारियों की सुरक्षा और औद्योगिक मानकों में कोई समझौता नहीं।
अजित सिंह/राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट)
ओबरा /सोनभद्र-
उत्तर प्रदेश की पावर कैपिटल कहे जाने वाले सोनभद्र में प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रदेशीय विद्युत व्यवस्था जांच समिति ने महत्वपूर्ण दौरा किया। सभापति अंगद कुमार सिंह के नेतृत्व में पहुंची टीम ने ओबरा थर्मल पावर प्लांट के प्लांट-सी का गहन निरीक्षण कर उत्पादन और सुरक्षा मानकों की समीक्षा की।समिति ने केवल कागजी आंकड़ों पर भरोसा न कर सीधे प्लांट के भीतर जाकर जमीनी हकीकत देखी।

टीम ने मुख्य मशीनरी ब्लॉक और कंट्रोल रूम में जाकर मशीनों की कार्यप्रणाली को समझा।पुरानी मशीनों के रखरखाव और नई तकनीकों के समन्वय पर अधिकारियों से विस्तार से चर्चा की गई।समिति ने स्पष्ट निर्देश दिए कि उत्पादन लक्ष्य के साथ-साथ कर्मचारियों की सुरक्षा और औद्योगिक मानकों में कोई समझौता नहीं होना चाहिए।निरीक्षण के बाद प्रशासनिक भवन में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य महाप्रबंधक (CGM) आर.के. अग्रवाल और वरिष्ठ इंजीनियरों के साथ भविष्य की योजनाओं पर चर्चा हुई।

समिति ने सुझाव दिया कि वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीकों का समावेश अनिवार्य है।प्रदेश सरकार का लक्ष्य हर घर तक निर्बाध बिजली पहुँचाना है। इस निरीक्षण का उद्देश्य उत्पादन में आने वाली बाधाओं को दूर करना है। अंगद कुमार सिंह,सभापति स्थानीय कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियाँ और बिजली व्यवस्था की मजबूती हमारे लिए प्राथमिकता है।विनीत सिंह, एमएलसी समिति द्वारा दिए गए सभी सुरक्षा निर्देशों और तकनीकी सुझावों का अक्षरश पालन किया जाएगा।

आर.के. अग्रवाल, मुख्य महाप्रबंधक (CGM) सभापति ने अंत में स्पष्ट किया कि इस निरीक्षण की एक विस्तृत रिपोर्ट उत्तर प्रदेश शासन को सौंपी जाएगी। इसमें प्लांट की जरूरतों, फंड के आवंटन और आवश्यक सुधारों का खाका होगा, ताकि ओबरा प्लांट अपनी पूरी क्षमता से प्रदेश को रोशन कर सके।

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