ओबरा तापीय विद्युत परियोजना संविदा श्रमिकों और SIPPL कंपनी के बीच बनी सहमति, बढ़ेगी मजदूरी

श्रमिकों को न्यूनतम वेतनमान के नियमों के अनुसार मजदूरों की पारिश्रमिक का भुगतान किया जायेगा- एसआईपीपीएल

अजित सिंह / राजेश तिवारी Picture
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ब्यूरो रिपोर्ट

ओबरा /सोनभद्र-

ओबरा तापीय विद्युत परियोजना (CTPS) में पिछले कुछ समय से संविदा श्रमिकों और प्रबंधन के बीच चल रहा गतिरोध अब समाप्त होता दिख रहा है। परियोजना में कार्यरत संविदा कंपनी Shree Infraprojects Private Limited (SIPPL) और श्रमिक संगठन के बीच हुई उच्च स्तरीय वार्ता में श्रमिकों की मांगों पर सकारात्मक सहमति बनी है।

बैठक के दौरान SIPPL के साइड इंचार्ज ने श्रमिकों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। वार्ता के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे।जिन श्रमिकों को कंपनी में कार्य करते हुए एक वर्ष से अधिक का समय हो गया है, उनके वेतन में संतोषजनक वृद्धि की जाएगी। कंपनी ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में वेतन भुगतान में देरी नहीं होगी और श्रमिकों को आर्थिक मानसिक प्रताड़ना का सामना नहीं करना पड़ेगा। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि सभी श्रमिकों को मिनिमम वेजेस (न्यूनतम मजदूरी) के नियमों के अनुसार भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।

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सहमति बनने के बाद मौजूद श्रमिकों ने खुशी जाहिर की और मजदूर एकता जिंदाबाद के नारे लगाए। श्रमिकों का कहना है कि संगठन की मजबूती और सही समय पर हस्तक्षेप की वजह से ही आज उनके अधिकारों की रक्षा हो पाई है। इस महत्वपूर्ण वार्ता में रामनरेश गौड़, मुस्तकीम अहमद, मोनू यादव, सुभाष सिंह, दीपक कुमार, रमाशंकर, गुलाम, लालजी देव पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में श्रमिक उपस्थित रहे।

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भारतीय संविदा श्रमिक संगठन के अध्यक्ष मणि शंकर पाठक ने इस जीत पर खुशी जताते हुए कहा संगठन का मुख्य उद्देश्य सदैव मजदूरों के हितों की रक्षा करना है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि कंपनी द्वारा किए गए वादे जमीन पर उतरें। श्रमिकों के अधिकारों के लिए हमारी आवाज निरंतर बुलंद रहेगी। औद्योगिक क्षेत्रों में अक्सर संविदा कर्मियों को बुनियादी सुविधाओं और वेतन के लिए संघर्ष करना पड़ता है, ऐसे में ओबरा CTPS में हुई यह सहमति एक सकारात्मक उदाहरण पेश करती है। अब देखना यह होगा कि कंपनी अपने वादों को कितनी जल्दी क्रियान्वित करती है।

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