प्रयागराज को भा रहा है पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया का तेवर

पुलिस कमिश्नरेट प्रयागराज की व्यवस्था की कमान जुलाई 2026 में संभालने के बाद पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया ने पुलिसिंग में जवाबदेही तय करने और अपराध नियंत्रण को लेकर लगातार सख्त रुख अपनाया है।

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स्वतंत्र प्रभात।ब्यूरो प्रयागराज 
 
दयाशंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।
 
पुलिस कमिश्नरेट प्रयागराज की व्यवस्था की कमान जुलाई 2026 में संभालने के बाद पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया ने पुलिसिंग में जवाबदेही तय करने और अपराध नियंत्रण को लेकर लगातार सख्त रुख अपनाया है। करीब ढाई महीने के कार्यकाल में उनकी ओर से लिए गए फैसलों में जहां पुलिसकर्मियों की लापरवाही और कथित सांठगांठ की शिकायते प्रमुख रही, वहीं आम लोगों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण और साइबर अपराध पर शिकंजा कसने के लिए भी बदलाव किए गए।
 
 
 
कमिश्नर का सबसे बड़ा एक्शन उस समय सामने आया, जब अपराधियों से सांठगांठ और अपेक्षित कार्रवाई नहीं करने की शिकायतों पर सेंट्रल, नगर, गंगानगर और यमुनानगर की चारों SOG टीमों को भंग कर दिया गया। इस कार्रवाई में दरोगा, दीवान और सिपाही समेत 45 पुलिसकर्मियों को हटाया गया। 
 
इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में साफ संदेश गया कि विशेष टीम में तैनाती को किसी तरह की मनमानी या लापरवाही की छूट नहीं मिलेगी।
 
इसके बाद थाना स्तर पर भी कमिश्नर ने सख्ती दिखाई। वसूली और लापरवाही की शिकायतों के बीच सात थाना प्रभारियों को लाइन हाजिर किया गया। साथ ही सात एसीपी के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया। अलग-अलग समय पर कई थानों में नए प्रभारियों की तैनाती भी की गई, जिससे कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण की जिम्मेदारी तय की जा सके।
 
साइबर अपराध पर भी बढ़ाया शिकंजा।
 
 
कमिश्नर के निर्देश पर साइबर अपराध के मामलों में भी कार्रवाई तेज हुई। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मुंबई की महिला डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट कर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया। कार्रवाई के दौरान करीब 65 लाख रुपये की ठगी की रकम फ्रीज कराई गई। इसके अलावा जुआ, सट्टा और मादक पदार्थों की अवैध बिक्री के खिलाफ भी विभिन्न इलाकों में अभियान चलाकर कार्रवाई की गई।
 
जनसुनवाई को थाने से ऊपर क्षेत्रीय स्तर तक पहुंचाया।
 
 
पुलिसिंग के साथ जनसुनवाई व्यवस्था में भी बदलाव कमिश्नर की प्राथमिकताओं में रहा। अब फरियादियों को हर शिकायत लेकर सिविल लाइंस स्थित पुलिस मुख्यालय पहुंचने की जरूरत न पड़े, इसके लिए डीसीपी नगर, गंगानगर और यमुनानगर अपने-अपने कार्यालयों में नियमित जनसुनवाई कर रहे हैं। इससे क्षेत्रीय स्तर पर ही शिकायतों को सुनने और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश देने की व्यवस्था मजबूत हुई है।
 
कमिश्नर खुद भी थानों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं। इस दौरान वह पुलिस अभिलेख, लंबित शिकायतें, अपराध की स्थिति और जनसंवाद व्यवस्था की समीक्षा कर रहे हैं। उनके अब तक के फैसलों को देखें तो पुलिसिंग में जवाबदेही, भ्रष्टाचार पर सख्ती और फरियादियों तक पुलिस अधिकारियों की सीधी पहुंच उनकी कार्यशैली के प्रमुख बिंदु बनकर सामने आए हैं।
 
जनता के लिए सरल पुलिसिंग, लापरवाही पर सख्त एक्शन
 
प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया ने कार्यभार संभालने के बाद अपराध नियंत्रण के साथ पुलिसकर्मियों की जवाबदेही पर भी जोर दिया है। हंडिया थाना प्रभारी अनूप सरोज और दरोगा बृजेश कुमार को जमीन विवाद में कथित घूसखोरी व एक पक्ष की पैरवी के मामले में निलंबित किया गया। मेजा थाना प्रभारी नितेंद्र शुक्ला और अतिरिक्त प्रभारी कमलेश यादव को आरोपी को कई दिन थाने में रखने के मामले में निलंबित किया गया। एडीए चौकी प्रभारी लेखपाल सिंह पर भी क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की जानकारी न होने पर कार्रवाई हुई। कमिश्नर ने चारों SOG टीमें भंग कर 44 पुलिसकर्मियों को हटाया। नैनी में स्मैक पर कार्रवाई करते हुए पूरी पुलिस टीम को बदलने का निर्णय भी उनकी बेहतर कार्य शैली को दर्शाता है।
 
 

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