पलामू माओवादी की आतंक में पति की हत्या, 19 वर्षों से दर-दर भटक रही विधवा महिला

सरकारी योजनाओं से अब तक वंचित आशा कुंवर ने पलामू उपायुक्त से लगाई आवास की गुहार

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पलामू, झारखंड:- जिले के पाटन प्रखंड अंतर्गत ग्राम कानोदी टोला सोनपुरवा से एक मार्मिक मामला सामने आया है, जो सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति पर कई सवाल खड़े करता है। गांव की विधवा महिला आशा कुंवर आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि वर्ष 2007 में जब झारखंड के कई इलाकों में माओवादी गतिविधियां चरम पर थीं, उस दौरान उनके पति स्वर्गीय मुनी यादव की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी।

बताया जाता है कि गांव में एक नहर निर्माण कार्य चल रहा था, जिसमें मुनी यादव मुंशी के रूप में कार्यरत थे। आरोप है कि माओवादियों द्वारा लेवी की मांग की गई थी, लेकिन मांग पूरी नहीं होने पर उनकी हत्या कर दी गई। घटना के बाद पलामू न्यायालय में मामला दर्ज हुआ, लेकिन 19 वर्ष बीत जाने के बावजूद परिवार को न्याय और सरकारी सहायता का अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका।

विधवा आशा कुंवर बताती हैं कि पति की मौत के बाद उन्होंने अकेले अपने तीन बेटियों और दो बेटों का पालन-पोषण किया। मजदूरी कर बच्चों को पढ़ाया-लिखाया और उनकी शादी-विवाह भी कराई। लेकिन संघर्ष का सिलसिला यहीं नहीं रुका। कुछ वर्ष पूर्व उनके बड़े पुत्र की किडनी की बीमारी के कारण मृत्यु हो गई। लगातार दुखों और आर्थिक संकटों का सामना करने के बावजूद उन्हें आज तक कोई विशेष सरकारी सहायता प्राप्त नहीं हुई।

आशा कुंवर का आरोप है कि सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना, अबुआ आवास योजना, अंबेडकर आवास योजना समेत कई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उन्हें नहीं मिला। जबकि उनके अनुसार गांव के कई अन्य लोगों को इन योजनाओं का लाभ दिया गया है। उनका घर जर्जर अवस्था में है, दरवाजे तक की समुचित व्यवस्था नहीं है और बरसात के दिनों में रहने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि पति की माओवादी हत्या के बाद उन्हें उम्मीद थी कि प्रशासन उनकी स्थिति को समझेगा, लेकिन आज तक कोई अधिकारी उनकी समस्याओं का जायजा लेने उनके घर नहीं पहुंचा। आशा कुंवर ने पलामू उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत से मांग की है कि उनकी स्थिति की जांच कर उन्हें अविलंब प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा किसी अन्य आवासीय योजना के तहत आवास उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें।

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