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डैमोग्राफी बदलाव भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा
शिक्षा : नई शिक्षा नीति 2020 के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जा रही है
मनोज कुमार अग्रवाल
जनसांख्यिकीय बदलाव के कारणों के अध्ययन, अवैध प्रवासन की जांच और समाधान हेतु भारत सरकार ने हाल ही में जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमेटी का गठन किया है। यह समिति राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संतुलन पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन कर रही है।इसके अतिरिक्त, डेमोग्राफिक डिविडेंड (जनसांख्यिकीय लाभांश) का लाभ उठाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए मुख्य कदम निम्नलिखित हैं. डीसीयुवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए स्किल इंडिया मिशन और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना चलाई जा रही है।रोजगार और उद्यमिता और मुद्रा योजना के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है।शिक्षा : नई शिक्षा नीति 2020 के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जा रही है।
आपको बता दें डेमोग्राफिक चेंज पर केंद्र सरकार ने हाई लेवल कमेटी का गठन किया है। बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में डेमोग्राफिक चेंज और घुसपैठ बड़ा मुद्दा था। इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार का घेराव किया था। इसी आधार पर भाजपा ने विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को मात दी और पूर्व बहुमत से सत्ता हासिल की। ऐसे में अब केंद्र सरकार द्वारा डेमोग्राफिक चेंज पर हाई लेवल कमेटी गठित करना अहम माना जा रहा है।
डेमोग्राफिक चेंज पर केंद्र सरकार ने हाई लेवल कमेटी का गठन किया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार (26 मई 2026) को इसकी घोषणा की. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि घुसपैठ और अन्य कारणों से किसी भी राष्ट्र के वर्तमान व भविष्य के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है. इसी चुनौती से निपटने के लिए 15 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डेमोग्राफिक चेंज पर 'हाई लेवल कमेटी' बनाने की घोषणा की थी. गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, 'मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि सरकार ने इस कमेटी का गठन कर लिया है. जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में बनी इस कमेटी में जनगणना आयुक्त के साथ दुर्गा शंकर मिश्रा (रिटायर्ड आईएएस), बालाजी श्रीवास्तव (रिटायर्ड आईपीएस) और डॉ. शमिका रवि समिति के सदस्य होंगे. संयुक्त सचिव (फॉरेनर्स-I), गृह मंत्रालय, इस समिति के सदस्य सचिव होंगे.'
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में डेमोग्राफिक चेंज और घुसपैठ बड़ा मुद्दा था. इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार का घेराव किया था. इसी आधार पर बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को मात दी और पूर्ण बहुमत से सत्ता हासिल की. ऐसे में अब केंद्र सरकार द्वारा डेमोग्राफिक चेंज पर हाई लेवल कमेटी गठित करना अहम माना जा रहा है.
आपको याद हो कि पीएम मोदी ने 15 अगस्त 2025 कहा था कि भारत अवैध घुसपैठ से निपटने के लिए जनसांख्यिकीय मिशन शुरू करेगा. उन्होंने लोगों को अवैध घुसपैठ के माध्यम से देश की जनसांख्यिकी को बदलने की सोची-समझी साजिश के बारे में चेतावनी दी और कहा कि कोई भी राष्ट्र घुसपैठियों को बर्दाश्त नहीं कर सकता, क्योंकि उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए एक उच्च स्तरीय जनसांख्यिकीय मिशन की घोषणा की.उनहोने कहा था आज देश के सामने एक चिंता, एक चुनौती के संबंध में आगाह करना चाहता हूं.
षड्यंत्र के तहत, सोची समझी साजिश के तहत देश की डेमोग्राफी को बदला जा रहा है. एक नए संकट के बीच बोए जा रहे हैं और यह घुसपैठिए, मेरे देश के नौजवानों के रोजी-रोटी छीन रहे हैं. यह घुसपैठिए मेरे देश की बहन बेटियों को निशाना बना रहे हैं, यह बर्दाश्त नहीं होगा. यह घुसपैठिए भोले भाले आदिवासियों को भ्रमित करके उनकी जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं. यह देश सहन नहीं करेगा और इसलिए मेरे प्यारे देशवासियों जब डेमोग्राफी परिवर्तन होता है, सीमावर्ती क्षेत्रों में डेमोग्राफी में परिवर्तन होता है, तब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संकट पैदा होता है.
देश की एकता, अखंडता और प्रगति के लिए यह संकट पैदा करता है. सामाजिक तनाव के बीज बो देता है और कोई देश अपना देश घुसपैठियों के हवाले नहीं कर सकता है. दुनिया का कोई देश नहीं कर सकता है, तो हम भारत को कैसे कर सकते हैं हमारे पूर्वजों ने त्याग और बलिदान से आजादी पाई है. हमें स्वतंत्र भारत दिया है, उन महापुरुषों के प्रति हमारा कर्तव्य हैं कि हम हमारे देश में ऐसी हरकतों को स्वीकार न करें, उनकी सच्ची श्रद्धांजलि होगी और इसलिए मैं आज लाल किले को प्राचीर से कहना चाहता हूं.
हमने एक हाई पावर डेमोग्राफी मिशन शुरू करने का निर्णय किया है. यह मिशन, इस मिशन के द्वारा यह जो भीषण संकट नजर आ रहा है, भारत पर मंडरा रहा है यह जो संकट है, उसको निपटाने के लिए तय समय में सुविचारित निश्चित रूप से अपने कार्य को करेगा, उस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं. भारत में धर्म के अनुसार जनसंख्या का प्रतिशत लगातार हिन्दू आबादी के गिरावट होने का संकेत देता है 1951 2011 2001 1991 1981 1971 1961 ह1951 हिंदू -4.30% 79.80% 80.50% 81.50% 82.30% 82.70% 83.50% 84.10% मुस्लिम 4.40% 14.20% 13.40% 12.60% 11.80% 11.20% 10.70% 9.80%। 1951 से 2011 तक की जनगणना में जो सभी धर्मों की जनसंख्या वृद्धि में असमानता दिखती है, उसका प्रमुख कारण घुसपैठ है. इस देश में 1951, 1971, 1991 और 2011 में जनगणना हुई, जिनमें शुरू से ही धर्म पूछने की परंपरा रही है.
1951 की जनगणना में हिंदू आबादी 84 प्रतिशत थी, जबकि मुस्लिम आबादी 9.8 प्रतिशत थी. 1971 में हिंदू आबादी 82 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी 11 प्रतिशत हो गई. 1991 में हिंदू आबादी 81 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी 12.2 प्रतिशत हो गई.वहीं, 2011 में हिंदू आबादी 79 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी 14.2 प्रतिशत हो गई. मुस्लिम आबादी में 24.6 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई है, जबकि हिंदू आबादी में 4.5 प्रतिशत की कमी आई है. मोदी सरकार की घुसपैठ विरोधी 3डी नीति- पहचान करना मतदाता सूची से हटवाना , उन्हें वापस भेजना है. सबसे गौरतलब बात है कि भारत में मुस्लिम समुदाय की आबादी हिंदू आबादी की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रही है. साल 2010 में 14.4% से बढ़कर 2050 में 18.4% होने का अनुमान है.
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा था कि झारखंड की आदिवासी आबादी में गिरावट के पीछे बांग्लादेशी घुसपैठ का हाथ है. उन्होंने मांग की थी कि राज्य के कुछ हिस्सों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और मालदा जिलों और बिहार के किशनगंज और कटिहार को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया जाए ताकि क्षेत्र में "बांग्लादेश से अवैध प्रवासियों" की बढ़ती संख्या से उत्पन्न चुनौती से निपटा जा सके, जिसके कारण, उनके अनुसार, आदिवासी आबादी में काफी कमी आई है.
उन्होंने ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया और कहा कि झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र में आदिवासियों की आबादी बांग्लादेशी घुसपैठियों की बढ़ती संख्या के कारण घट रही है. उन्होंने कहा कि संथाल परगना क्षेत्र में आदिवासी आबादी 2000 में 36% थी, जो अब घटकर 26% रह गई है. उन्होंने पूछा, 'ये आदिवासी कहां चले गए?'2014 से, भारत की सीमाओं पर घुसपैठ के 8,500 से अधिक प्रयासों का पता चला है, जबकि 20,000 से अधिक घुसपैठियों को गिरफ्तार किया गया है.
भारत में जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर सुरक्षा, अर्थशास्त्र और नीति निर्माण के स्तर पर अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। केंद्र सरकार और सुरक्षा विश्लेषकों का एक वर्ग इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संतुलन के लिए गंभीर चुनौती मानता है, जबकि अर्थशास्त्री और जनसांख्यिकी विशेषज्ञ इसे गिरती प्रजनन दर और बुजुर्ग होती आबादी से जुड़ी आर्थिक चुनौती के रूप में देखते हैं।इस विषय को मुख्य रूप से अलग-अलग दृष्टिकोणों के माध्यम से समझा जा सकता है: सुरक्षा और सामाजिक संतुलन का दृष्टिकोण इस दृष्टिकोण के तहत, देश के कुछ विशिष्ट क्षेत्रों, विशेषकर सीमावर्ती इलाकों में हो रहे "अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय बदलाव" को एक बड़ा खतरा माना जाता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, अवैध घुसपैठ और अनियमित प्रवासन के कारण सीमावर्ती राज्यों (जैसे असम, पश्चिम बंगाल, और बिहार) की जनसंख्या बनावट में असामान्य बदलाव आए हैं, जो कानून-व्यवस्था और संप्रभुता के लिए चिंता का विषय हैं।सरकार को गंभीरता से सख्त कदम उठाने चाहिए ।
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