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चुनार तहसील के रामगढ़ निवासी डॉ. आर.के. सिंह बने उत्तराखंड उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के निदेशक
सीखड़ मीरजापुर।
संवाददाता विभूति पांडेय उर्फ रतन पांडेय
मीरजापुर। चुनार तहसील के रामगढ़ कृयात गांव के मूल निवासी एवं प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ. आर.के. सिंह को उत्तराखंड शासन द्वारा उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग का निदेशक नियुक्त किया गया है। उनकी इस महत्वपूर्ण उपलब्धि से सीखड़ क्षेत्र सहित पूरे मीरजापुर जनपद में खुशी की लहर है।
सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य बलिराम सिंह के तीन पुत्रों में सबसे बड़े डॉ. आर.के. सिंह की यह उपलब्धि वर्षों की कठिन मेहनत, लगन और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1997 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा उनका चयन पौध संरक्षण अधिकारी के पद पर हुआ था। वर्ष 2000 में उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद से उन्होंने वहां विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं प्रदान कीं।
अपने उत्कृष्ट कार्यों और प्रशासनिक दक्षता के बल पर वर्ष 2008 में उप निदेशक, वर्ष 2017 में संयुक्त निदेशक, वर्ष 2020 में अपर निदेशक तथा वर्ष 2026 में उन्हें विभाग का निदेशक नियुक्त किया गया है।
डॉ. सिंह की शैक्षिक यात्रा भी युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने हाईस्कूल की शिक्षा श्री शिवाजी नेशनल इंटर कॉलेज हांसीपुर तथा इंटरमीडिएट की शिक्षा राजकीय इंटर कॉलेज जक्खिनी, वाराणसी से प्राप्त की। इसके बाद चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से कृषि विज्ञान में परास्नातक तथा नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या (पूर्व में फैजाबाद) से पीएचडी की उपाधि अर्जित की।
डॉ. सिंह का विवाह चुनार क्षेत्र के फिरोजपुर गांव के पूर्व प्रधान हंसनारायण सिंह की पुत्री अर्चना सिंह के साथ हुआ है। उनकी नियुक्ति पर क्षेत्रीय विधायक अनुराग सिंह, पूर्व विधायक जगतंबा सिंह पटेल, ब्लॉक प्रमुख सीखड़ छत्रपति सत्येंद्र कुमार सिंह, नारायनपुर के चंद्रप्रकाश सिंह, पूर्व ब्लॉक प्रमुख अनमोल सिंह, ई. राजबहादुर सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है।
ग्रामीण परिवेश में प्रतिभाओं की कमी नहीं
डॉ. आर.के. सिंह ने कहा कि ग्रामीण परिवेश में रहने वाले युवाओं के लिए संसाधनों की कमी कभी बाधा नहीं बनती, यदि उनके भीतर लक्ष्य के प्रति समर्पण, मेहनत और सीखने की ललक हो। उन्होंने कहा कि उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि गांव की मिट्टी में पले-बढ़े युवा भी अपनी प्रतिभा और परिश्रम के बल पर देश के सर्वोच्च प्रशासनिक एवं तकनीकी पदों तक पहुंच सकते हैं।


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