त्रिवेणीगंज में दम तोड़ रही डोर-स्टेप डिलीवरी, मनमर्जी सिस्टम' से पीडीएस हुई बेपटरी

निजी हाथों में गोदाम की कमान; उठाव सम्बंधित रोस्टर सिस्टम हुआ ध्वस्त आम डीलर गोदाम पर काटने को मजबूर हैं चक्कर

BIHAR SWATANTRA PRABHAT Picture
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​सुपौल, स्वंतत्र प्रभात

सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में शुमार  जन वितरण प्रणाली  की व्यवस्था विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और मनमर्जी के कारण पूरी तरह पटरी से उतर गई है। विभागीय नियमों को ताक पर रखकर  खाद्यान्न का वितरण सहायक गोदाम प्रबंधक  की कथित तानाशाही और पसंद-नापसंद के आधार पर किया जा रहा है, जिससे स्थानीय डीलरों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

साहब रहते हैं सुपौल में 'प्राइवेट' हाथों में त्रिवेणीगंज गोदाम की चाबी

​मिली जानकारी के अनुसार,  सहायक गोदाम प्रबंधक (AGM) खुद मुख्यालय में न रहकर सुपौल में डेरा जमाए रहते हैं।सूत्रों के अनुसार , उनके पास सहायक जिला प्रबंधक के  साथ-साथ दो अन्य गोदामों का भी अतिरिक्त प्रभार है। नतीजा यह है कि त्रिवेणीगंज गोदाम भगवान भरोसे चल रहा है। डीलरों का कहना है कि  साहब की अनुपस्थिति में पूरा गोदाम एक बिभागीय ऑपरेटर और कुछ 'खास' निजी व्यक्तियों के इशारे पर संचालित हो रहा है।

​रोस्टर हुआ तार-तार, जारी है 'पार्ट-पार्ट' खाद्यान्न वितरण का नयाब  खेल
​विभागीय गाइडलाइन के अनुसार, सभी डीलरों के लिए खाद्यान्न उठाव का एक निश्चित रोस्टर तय है, लेकिन यहाँ इस रोस्टर को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।

​चहेतों पर मेहरबानी: नियमतः डोर-स्टेप डिलीवरी के तहत डीलरों को एकमुश्त अनाज मिलना चाहिए, लेकिन यहाँ 'पार्ट-पार्ट' (टुकड़ों में) अनाज दिया जा रहा है।

​अतिरिक्त आवंटन का खेल: आरोप है कि सिंडिकेट के चहेते डीलरों को न सिर्फ पहले अनाज दिया जाता है, बल्कि उन्हें उनके तय आवंटन से भी अधिक खाद्यान्न थमा दिया जाता है।

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​कागजों पर अनाज डीलरों के दरवाजे तक पहुंचना चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि एसएफसी (SFC) गोदाम पर हर दिन डीलरों का मेला लगा रहता है।  हालांकि डीलरअपनी मजबूरी बताते हुए कहते हैं कि 
​"अगर हम खुद गोदाम पर जाकर सुबह से शाम तक दबाव न बनाएं, तो महीने के अंत तक अनाज नसीब नहीं होगा। जब तक हमारा अनाज मिलता है, तब तक रसूखदार डीलर वितरण भी पूरा कर लेते हैं।

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​सरकारी नियम के मुताबिक, यदि कोई डीलर समय पर शत-प्रतिशत वितरण नहीं कर पाता, तो अगले महीने उसका आवंटन घटा दिया जाता है। वहीं, 'वन नेशन वन राशन कार्ड' योजना के तहत दूसरे पंचायतों और जिलों के लाभुकों को राशन बांटने की छूट है। आरोप है कि इसी नियम की आड़ में कुछ खास डीलर सांठगांठ कर अपना वितरण का आंकड़ा बढ़ा लेते हैं और उनका आवंटन बढ़ जाता है, जबकि नियम का पालन करने वाले आम डीलरों का कोटा घट जाता है।

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जवाब देने से बच रहे जिम्मेदार पल्ला झाड़ा:

इस गंभीर अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के आरोपों पर जब एजीएम से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने चुप्पी साध ली और कोई जवाब नहीं दिया।​एमओ का अजीबोगरीब तर्क: मामले पर प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी नेहा कुमारी ने अजीबोगरीब बयान देते हुए कहा, "इस मामले में क्या कह सकती हूं, एजीएम ही बता सकते हैं। हालांकि, पार्ट उठाव जनता के हित में किया जा रहा है, जो सही है।"

बड़ा सवाल: आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है यह 'सिंडिकेट'?

​जब सरकार ने राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने और कालाबाजारी रोकने के लिए सीधे डीलर के घर तक अनाज पहुंचाने (डोर-स्टेप डिलीवरी) की व्यवस्था लागू की है, तो त्रिवेणीगंज में डीलरों की यह भीड़ और गोदाम पर मची यह लूट किसके शह पर चल रही है? उच्चाधिकारियों की इस मामले पर चुप्पी कई बड़े सवाल खड़े करती है।

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