इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्नी और बेटियों पर सेक्स रैकेट चलाने का झूठा आरोप लगाने वाले व्यक्ति को फटकारा

तस्वीरों और बरामद वीडियो में दिख रहे चेहरों में कोई मेल नहीं था

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ब्यूरो प्रयागराज- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को व्यक्ति की क्रिमिनल रिट याचिका खारिज की। इस व्यक्ति ने कानपुर नगर में चल रहे कथित सेक्स रैकेट में शामिल लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग की। हालांकि, याचिकाकर्ता ने शुरू में अपनी पत्नी और बेटी के अश्लील वीडियो ऑनलाइन अपलोड किए जाने पर चिंता जताई, लेकिन बाद की सुनवाई में उसने अपने परिवार के सदस्यों पर अनैतिकता का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ अपमानजनक और झूठे आरोप लगाए।

स पर कड़ा रुख अपनाते हुए जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की बेंच ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई। बेंच ने कहा कि अपनी ही पत्नी और बेटी के खिलाफ उसके दावे "पूरी तरह से झूठे" हैं। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता "खुद को दूसरों से ज़्यादा पवित्र समझने की मानसिकता" (Holier-Than-Thou Syndrome) से ग्रस्त है और खुद को "समाज की सभी अनैतिकताओं के खिलाफ लड़ने वाला योद्धा" समझता है।

हाईकोर्ट ने कहा कि यह याचिका असल में पारिवारिक विवाद से जुड़ी थी। अपने ही परिवार पर सेक्स रैकेट चलाने का आरोप लगाना पारिवारिक मामले को कोर्ट के सामने रखने का "सबसे घिनौना" तरीका है। गौरतलब है कि याचिकाकर्ता द्वारा डिजिटल फॉर्मेट में दी गई कई वीडियो फाइलों और स्क्रीनशॉट की प्रामाणिकता की जांच करने के लिए पुलिस ने उन्हें IIT कानपुर के C3iHub को सौंप दिया। हालांकि, IIT कानपुर की रिपोर्ट से पता चला कि याचिकाकर्ता द्वारा दी गई तस्वीरों और बरामद वीडियो में दिख रहे चेहरों में कोई मेल नहीं था।

फोरेंसिक जांच से यह भी पता चला कि बरामद मीडिया फाइलें लगभग 10-12 साल पुरानी थीं। रिपोर्ट में कहा गया कि "उपलब्ध डिजिटल सबूत इस निष्कर्ष का समर्थन करते हैं कि पहचान गलत या भ्रामक तरीके से जोड़ी गई।"इस रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए बेंच ने विशेष रूप से यह टिप्पणी की: "IIT कानपुर की उपरोक्त रिपोर्ट से हमें यह मानने का आधार मिलता है कि याचिकाकर्ता ने अपने परिवार पर सेक्स रैकेट आदि में शामिल होने के जो बेबुनियाद आरोप लगाए हैं, जिन्हें वेबसाइटों पर दिखाया गया, वे पूरी तरह से झूठे हैं।"

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बेंच ने यह टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता लगातार अपने ही अहंकार में डूबा हुआ है। उसके परिवार पर सेक्स रैकेट में शामिल होने के जो बेबुनियाद आरोप उसने लगाए, वे बेहद आपत्तिजनक हैं—जिनमें से कुछ तो रिकॉर्ड से हटाए जाने योग्य हैं अतः, इस निष्कर्ष पर पहुंचते हुए कि इन खोखले आरोपों के आधार पर पुलिस को किसी भी प्रकार के सेक्स रैकेट की जाँच करने का निर्देश जारी करने का कोई आधार नहीं है, याचिका खारिज कर दी गई।

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