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दो निवाले ज्यादा मांगने के जुर्म में जेल के आला अधिकारियों ने कैदी को पेड़ से बांधकर जानवरों की तरह पीटा
सुधार गृह' वाले मुखौटे को उतार फेंका है। जेल के भीतर रक्षकों ने ही भक्षक बनकर एक कैदी पर वह कहर ढाया है मानव अधिकार का उल्लंघन किया पुलिसकर्मियों ने
बस्ती। जिला जेल बस्ती से मानवता को शर्मसार करने वाली एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने जेल प्रशासन के 'सुधार गृह' वाले मुखौटे को उतार फेंका है। जेल के भीतर रक्षकों ने ही भक्षक बनकर एक कैदी पर वह कहर ढाया है जिसे सुनकर रूह कांप जाए। सिर्फ दो निवाले ज्यादा मांगने के जुर्म में जेल के आला अधिकारियों ने कैदी को पेड़ से बांधकर जानवरों की तरह पीटा।
वर्दियों के पीछे छिपे 'दरिंदे' नामजद शिकायत
कैदी सूरज चौधरी की पत्नी अंजनी ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में जेल के रसूखदार अधिकारियों को बेनकाब किया है। पीड़िता ने सीधे तौर पर जेल अधीक्षक शिव प्रताप मिश्र, डिप्टी जेलर त्रिलोकी नाथ, वंदना त्रिपाठी, रोशन आरा और सिपाही प्रदीप कुमार पर जानलेवा हमले का आरोप लगाया है। आरोप है कि इनके साथ 20 अन्य सिपाहियों ने मिलकर सूरज को 'सबक' सिखाने के नाम पर नंगा नाच किया।
अमानवीय टॉर्चर पेड़ से बांधा, पाइप से पीटा और आंख में जूते मारेशिकायत के अनुसार, सूरज का कसूर बस इतना था कि उसने भूख लगने पर थोड़े और खाने की मांग की थी। इस 'गुस्ताखी' पर भड़के अधिकारियों ने उसे पेड़ से जकड़ दिया। फिर शुरू हुआ मौत का तांडव—प्लास्टिक की पाइप (बेंत) से शरीर का कोई कोना नहीं छोड़ा गया, जूतों से चेहरे को कुचला गया और उसे तब तक मारा गया जब तक वह बेहोश होकर गिर नहीं गया। क्रूरता की हद तो तब हो गई जब उसकी आंख पर सीधे प्रहार किए गए, जिससे उसकी आंख खून से भर गई है और उसे दिखना बंद हो गया है।
अपराध छिपाने के लिए 'किलेबंदी'
अपनी खाल बचाने के लिए जेल प्रशासन ने अब पीड़ित कैदी को दुनिया से काट दिया है। पत्नी का आरोप है कि उसे पति से मिलने नहीं दिया जा रहा और सरकारी फोन तक बंद कर दिए गए हैं ताकि अंदर की चीखें बाहर न आ सकें। जेल की चारदीवारी के भीतर एक इंसान को इलाज के अभाव में मरने के लिए छोड़ दिया गया है।
प्रशासन पर सवाल: क्या यही है न्याय एक तरफ सरकार मानवाधिकारों की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ शिव प्रताप मिश्र और उनकी टीम पर लगे ये आरोप व्यवस्था पर तमाचा हैं। पीड़िता ने गुहार लगाई है कि उसके पति को बाहर के अस्पताल में भर्ती कराया जाए, वरना वह जेल के भीतर ही दम तोड़ देगा।अब सवाल यह है कि क्या इन वर्दीधारी 'गुंडों' पर एफआईआर होगी या प्रशासन अपनी साख बचाने के लिए इस खूनी खेल पर पर्दा डालेगा?
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