अपना घर आश्रम पर अंग तस्करी और शव गायब करने का आरोप, आयोग ने मांगा जवाब

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने डीएम और कमिश्नर को जारी किया नोटिस,परिजनों को सूचना दिए बिना गुपचुप तरीके से शव का किया अंतिम संस्कार

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कानपुर। महानगर के सेन पश्चिम पारा स्थित 'अपना घर आश्रम' में रह रहे एक अधेड़ व्यक्ति की संदिग्ध मौत और गुपचुप अंतिम संस्कार ने बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। तिवारीपुर निवासी विमला पासवान ने आश्रम संचालकों पर अपने पति ओमप्रकाश की हत्या कर मानव अंग तस्करी करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है।  पीड़िता का कहना है कि उनके पति को जबरन आश्रम में रखा गया और मृत्यु के बाद परिजनों को बताए बिना शव गायब कर दिया गया।
 
मामला बीते साल 2025 के अगस्त महीने का है। महिला का आरोप है कि आश्रम संचालकोंके पास खुद की एम्बुलेंस भी है। इसी वो पूरे शहर में और आसपास इलाकों से गरीब, लावारिस और मजलूमों को उठाकर आश्रम ले आते हैं। फिर लंबे समय में इन लोगों का क्या होता है, किसी को पता नहीं। एम्बुलेंस से किसी को कभी अस्पताल नहीं ले जाया जाता है। इसलिए आश्रम से हर महीने दो चार लाशें लावारिस के तौर पर दाह संस्कार के लिए कहीं अज्ञात स्थानों पर ले जाए जाती हैं। उनके पति का शव नहीं दिखाया गया, उनको संदेह है कि किडनी जैसे उनके अंग निकाल लिए गए, जिसके लिए आश्रम पर आरोप लगाते हैं। 
 
इस मामले में स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। मृतक की पत्नी विमला पासवान का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने आरोपियों से साठगांठ कर मामले को दबाने की कोशिश की। फिर मशक्कत के बाद शिकायत का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने कानपुर के जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट तलब की है। फिलहाल एडीसीपी साउथ योगेश कुमार मामले की जांच कर रहे हैं।
 
उधर, आश्रम के सचिव जेपी सिंह और संचालक उमा शुक्ला ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका तर्क है कि मृतक गंभीर रूप से बीमार था और उसकी मृत्यु प्राकृतिक थी। उन्होंने पीड़िता पर ही शिकायत वापस लेने के बदले लाखों रुपये की मांग करने और ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया है। पुलिस अब आश्रम के रिकॉर्ड और पीड़िता के बयानों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है।

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