'किडनी मंडी' में  पांच से 10 लाख में खरीदते, एक करोड़ तक में बेचते

विदेशी समेत 50 की किडनी बदली

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ब्यूरो प्रयागराज। अवैध रूप से किडनी की खरीद-फरोख्त कर ट्रांसप्लांट करने वाले गिरोह के तार विदेश तक फैले हैं। गिरोह ने पिछले दो साल में अवैध ढंग से 50 से अधिक मरीजों की किडनी ट्रांसप्लांट की। 3 मार्च को भी आहूजा हॉस्पिटल में दक्षिण अफ्रीका की महिला अरेबिका की अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट की गई थी।

इसके बाद पुलिस ने गिरोह में शामिल इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) कानपुर की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा, उसके पति डॉ. सुरजीत, दलाल शिवम अग्रवाल एवं तीन अस्पताल संचालकों को गिरफ्तार कर मंगलवार को जेल भेज दिया।पुलिस ने 15 आरोपियों के खिलाफ मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम की धारा में रिपोर्ट दर्ज की है। गिरफ्तार आरोपियों में मेडलाइफ हॉस्पिटल का संचालक राजेश कुशवाहा, प्रिया हॉस्पिटल का संचालक नरेंद्र सिंह, आरोही हॉस्पिटल का संचालक राम प्रकाश कुशवाहा शामिल है।

किडनी रैकेट का खुलासा करते हुए पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि रावतपुर थाने के दरोगा को अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट की सूचना मिली थी। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने काकादेव के नवीन नगर निवासी आरोपी डॉक्टर दंपती के केशवपुरम रोड स्थित आहूजा हॉस्पिटल, कल्याणपुर आवास विकास-एक स्थित प्रिया हॉस्पिटल, पनकी-कल्याणपुर रोड स्थित मेडलाइफ हॉस्पिटल में छापा मारा।

जांच के दायरे में आए तीन अन्य नर्सिंगहोम संचालकों को देर रात पुलिस ने हिरासत में ले लिया। जांच में पता चला कि दलाल शिवम आठवीं पास है। वह खुद को डॉक्टर बताकर लोगों को फंसाता था। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि ट्रांसप्लांट करने वाले नोएडा निवासी डॉ. रोहित, डॉ. अफजाल, डॉ. वैभव और डॉ. अनुराग की तलाश की जा रही है। डॉ. अफजाल और अन्य आरोपी टेलीग्राम चैनल के माध्यम से एक दूसरे के संपर्क में रहते थे।

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 जरूरतमंदों से पांच से 10 लाख रुपये में किडनी खरीदते थे और उसे 60 लाख से एक करोड़ रुपये तक में बेच देते थे। काली कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा डॉ. रोहित लेता था। दिल्ली एनसीआर के भी कुछ अन्य डॉक्टर गिरोह में शामिल है। इनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें रवाना हो गई हैं।

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पुलिस कमिश्नर ने बताया कि ट्रांसप्लांट करने वाले डॉ. रोहित, मरीज पारुल से संपर्क करने वाले नोएडा के अफजाल, वैभव और अनुराग की तलाश की जा रही है। उन्होंने बताया कि अफजाल और अन्य आरोपी टेलीग्राम चैनल के माध्यम से एक दूसरे के संपर्क में हैं। आरोपी जरूरतमंदों को पैसों का लालच देकर पांच से 10 लाख रुपये में किडनी खरीदते थे। उसे अमीर परिवार के मरीजों को 60 लाख से एक करोड़ रुपये तक में बेच देते थे।

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