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डूडा विभाग में ' अवैध वसूली' का बड़ा खेल होने के आरोप
सी.एल टी.सी. मधुकर तिवारी पर ₹50,000 तक वसूलने के आरोप
लखीमपुर-खीरी। भले ही सूबे के मुखिया योगी आदित्य नाथ भ्रस्टाचार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए जीरो टोलरेंस की नीति लागू किये हों पर जनपद खीरी में सरकार की इस नीति का कोई असर पड़ते दिखाई नहीं पड रहा है।लोगों की माने तो इतना भ्रस्टाचार तो किसी सरकार में नहीं था जितना इस भ्रस्टाचार मुक्त उत्तर प्रदेश का दावा और वादा करने वाले सरकार में हो रहा है।लोगों की भावनाएं बता रहीं हैं कि अफसरों की मनमानी और खाउ कमाऊ नीति का खामियाजा मिशन 2027 भुगतना पड सकता है।
भ्रस्टाचार और अवैध वसूली का एक ऐसा ही ताजा मामला शहरी पी.एम. आवास योजना में प्रकाश में आया है।सूत्र बताते हैं कि जनपद में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) अब गरीबों को छत देने के बजाय भ्रष्टाचार का अड्डा बन कर रह गई है। जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) कार्यालय में तैनात सी. एल.टी.सी. मधुकर तिवारी पर डूडा से निष्कासित किये जा चुके पुराने सर्वेयरों के माध्यम से लाभार्थियों से अवैध वसूली कराने के सनसनीखेज आरोप लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, आवास की किश्त जारी करने के नाम पर लाभार्थियों से ₹20,000 से लेकर ₹50,000 तक की मोटी रकम वसूली जा रही है।
हटाए गए सर्वेयर बने 'वसूली एजेंट'--
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जिन सर्वेयरों को विभाग से पहले ही हटाया जा चुका है, उन्हें मधुकर तिवारी ने अपना 'प्राइवेट एजेंट' बना रखा है। ये पूर्व सर्वेयर फील्ड में जाकर लाभार्थियों को डराते हैं कि यदि पैसा नहीं दिया गया, तो उनकी अगली किश्त रोक दी जाएगी या उन्हें अपात्र घोषित कर दिया जाएगा।
भ्रष्टाचार का फिक्स रेट: ₹20,000 से ₹50,000 तक योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि में से ही यह अवैध हिस्सा मांगा जाता है। लाभार्थियों का आरोप है कि:यदि उन्होंने तयशुदा राशि नहीं दी तो उनकी किश्त रोक दी जाएगी या फिर अपात्र कर दिया जाएगा ऐसा हुआ भी है जिन मजदूरी पेशा लोगों ने गली गली घूम रहे बिचौलियों को तय शुदा रकम नहीं दी वह आज भी एक अदद छत के लिए डूडा के चक्कर काटते फिर रहे हैं।
किश्त के बदले कमीशन....
कुछ जानकार और विभागीय सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पहली और दूसरी किश्त के समय लाभार्थियों पर दबाव बनाया जाता है कि वे तय रकम (20 से 50 हजार) पहुंचा दें।अन्यथा किश्त रोक दी जाएगी या अपात्र कर दिया जाएगा।
अपात्रों को 'पात्र' बनाने का खेल--------
कई पी. एम आवास लाभार्थियों ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया कि मोटी रकम लेकर अपात्र लोगों को पात्र घोषित कर दिया जाता है,। जबकि वास्तव में जरूरतमंद गरीब आज भी झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं। मोहल्ला हिदायत नगर में ऐसे ही दो लोगों से मोटी रकम वसूल कर नौ लैंड स्पेस के बाद भी पी.एम. आवास से नवाजा गया है उक्त को पहली किश्त भी भेजी जा चुकी है ऐसा नहीं कि इस भ्रस्टाचार और अवैध वसूली की जानकारी परियोजना अधिकारी डूडा को नहीं है।सब कुछ जानने के बाद भी मिल रहे तयशुदा हिस्सेदारी के चलते उन्हें सब कुछ ठीक ही नजर आ रहा है। यही कारण है कि वास्तविक जरूरत मंद ,मज़दूरी पेसा लोगों को उनका हक नहीं मिल पा रहा हैं।और बमुश्किल 8000se 10,000 पाने वाले डूडा कर्मी बुलेट से फर्राटे भरते और शाम में हज़ारों की शराब और मुर्गा मटन उड़ाते देखे जा सकते है
जियो-टैगिंग में धांधली:-------
पैसा न देने वाले पात्र लाभार्थियों की जियो-टैगिंग में नाना प्रकार की कमियां निकालकर उनकी फाइलें लटका दी जाती हैं। और चढावा चढ़ाने वालों पर खासा मेहरबानी दिखाए जाने की बातें प्रकाश में आयी है
शासन की मंशा पर पानी फेर रहे जिम्मेदार------
जहाँ एक ओर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री "जीरो टॉलरेंस" की नीति लागू करने के बड़े बड़े दावे और वादे करते हैं, वहीं लखीमपुर डूडा में तैनात सी. एल .टी.सी. मधुकर तिवारी जैसे जिम्मेदार कर्मचारी अपनी जेबें भरने में मस्त हैं। हटाए गए बाहरी लोगों का विभाग के काम में हस्तक्षेप करना और वसूली करना एक बड़े सिंडिकेट की ओर इशारा करता है। यहां पर अहम सबाल यह पैदा होता है कि आखिर डूडा से निकाले जा चुके कर्मचारी किस सक्षम अधिकारी के आदेश से पी .एम. आवास योजना का काम देख रहे हैं और आवास के नाम पर अवैध धन उगाही कर रहे हैं?
जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग:--------
जनपद के पीड़ित लाभार्थियों और जागरूक नागरिकों ने जिलाधिकारी लखीमपुर खीरी दुर्गा शक्ति नागपाल से इस मामले की तत्काल विजिलेंस जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि सी. एल.टी.सी. मधुकर तिवारी और उनके निजी वसूली एजेंटों के कॉल डिटेल्स और बैंक खातों की जांच की जाए, तो करोड़ों के घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है।और कई लोगों को जाना पड सकता है सलाखों के पीछे तथा पी.ओ.डूडा की भी तय होगी जबाब देही।
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