मोहनलालगंज: रसूख के साये में 'वन संपदा' पर संकट, 10 बीघा सुरक्षित भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप
.......अतरौली में वन विभाग की जमीन पर बने विला और बाउंड्रीवॉल; ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, प्रशासन की चुप्पी पर उठाए सवाल
मोहनलालगंज, लखनऊ। राजधानी के मोहनलालगंज तहसील अंतर्गत अतरौली गांव में रसूखदारों द्वारा सरकारी तंत्र को ठेंगा दिखाकर वन विभाग की सुरक्षित भूमि पर अवैध कब्जे का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्रीय भू-माफिया और प्रभावशाली व्यक्तियों ने सांठगांठ कर करीब 10 बीघा बेशकीमती वन भूमि को बाउंड्रीवॉल से घेर लिया है और वहां विला व बोरिंग जैसे पक्के निर्माण करा लिए हैं। हैरत की बात यह है कि पर्यावरण संरक्षण की दुहाई देने वाला वन विभाग और स्थानीय प्रशासन इस बड़े अतिक्रमण से अनजान बना हुआ है, जिससे ग्रामीणों में गहरा रोष व्याप्त है।
अभिलेखों में 'वन' श्रेणी की जमीन पर कब्जा
ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के अनुसार, ग्राम अतरौली स्थित गाटा संख्या 1135, जो राजस्व अभिलेखों में श्रेणी 5-3-ख (वन श्रेणी) के अंतर्गत दर्ज है, का कुल क्षेत्रफल लगभग 4.4830 हेक्टेयर है। यह पूरी भूमि दशकों से वन क्षेत्र के रूप में संरक्षित रही है और गांव के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने के साथ-साथ पशुओं के चारे और स्थानीय आजीविका का मुख्य आधार रही है। आरोप है कि पिछले कुछ समय में रसूख के बल पर इस सुरक्षित भूमि के एक बड़े हिस्से (लगभग 10 बीघा) पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया। मौके पर न सिर्फ बाउंड्रीवॉल खड़ी कर दी गई है, बल्कि विला बनाकर प्राकृतिक संपदा को निजी संपत्ति में तब्दील करने का प्रयास किया जा रहा है।
अधिकारियों की चौखट पर न्याय की गुहार
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने इस अवैध अतिक्रमण की शिकायत कई बार वन विभाग के स्थानीय अधिकारियों और तहसील प्रशासन से की, लेकिन रसूखदारों के दबाव के चलते अब तक धरातल पर कोई कार्रवाई नजर नहीं आई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की यह सुस्ती कहीं न कहीं बड़े संरक्षण की ओर इशारा करती है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों की मांग है कि सरकारी पैमाइश कराकर तत्काल अवैध निर्माण ढहाए जाएं और पर्यावरण संरक्षण नियमों का उल्लंघन करने वाले दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में सरकारी जमीनों पर ऐसी नजर न डाली जा सके।
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