होली पर 'हक' की होली: मोहनलालगंज के मनरेगा कर्मियों के घर छाया अंधेरा, 11 महीने से मानदेय का इंतजार

.......अतिरिक्त काम का बोझ और खाली जेब; ब्लॉक अध्यक्ष अंकुर शुक्ला ने उठाए सवाल— क्या ऐसे मनेगा उत्सव ?

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मोहनलालगंज/ लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज विकास खंड समेत पूरे जिले में जहाँ एक ओर होली के त्योहार को लेकर उल्लास का माहौल है, वहीं ग्राम रोजगार सेवकों और मनरेगा कर्मियों के घरों में पिछले 11 महीनों से मानदेय न मिलने के कारण गहरा सन्नाटा और घोर आर्थिक तंगी पसरी हुई है। विडंबना यह है कि दूसरों के गांवों के विकास का जिम्मा उठाने वाले इन 56 ग्राम रोजगार सेवकों समेत जिले के कुल 319 कर्मचारियों के सामने अब रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है, जिससे त्योहार की खुशियाँ हताशा में बदल गई हैं।
 
ग्राम रोजगार संघ के ब्लॉक अध्यक्ष अंकुर शुक्ला ने विभाग की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे सीधे तौर पर मानवाधिकारों का हनन करार दिया है; उन्होंने व्यथा व्यक्त की है कि एक तरफ इन कर्मियों को मनरेगा के मूल कार्यों के अलावा क्रॉप सर्वे, बीएलओ ड्यूटी और फैमिली आईडी जैसे भारी-भरकम गैर-विभागीय कामों के चक्रव्यूह में झोंक दिया गया है, और दूसरी तरफ करीब साल भर से वेतन के लाले पड़ने के कारण कई कर्मचारी कर्ज के दलदल और भारी मानसिक तनाव में डूब चुके हैं।
 
स्थिति इतनी भयावह और चिंताजनक हो चली है कि आर्थिक तंगी से बेबस कर्मचारी अब आत्मघाती कदम उठाने जैसे विचारों के मुहाने पर खड़े हैं, ऐसे में अब सबकी नजरें योगी सरकार के 'जीरो टॉलरेंस' और 'संवेदनशील प्रशासन' के दावों पर टिकी हैं कि क्या मुख्यमंत्री इन बदहाल कर्मचारियों की बेरंग होती होली में न्याय का रंग भर पाएंगे।

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