एक नासमझ की नस्ली टिप्पणी से पूर्वोत्तर तक पीड़ा
मनोज कुमार अग्रवाल
नई दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में अरुणाचल प्रदेश की तीन लड़कियों के साथ कथित नस्लीय टिप्पणी और अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया है। एयर कंडीशनर लगाने को लेकर शुरू हुआ एक मामूली पड़ोसी विवाद देखते ही देखते गंभीर आरोपों में बदल गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है यह कोई पहली बार नहीं है कि पूर्वोत्तर भारत के लोगों के साथ उनकी शारीरिक बनावट व संस्कृति को लेकर कहीं शेष देश में अभद्रता की गई हो। यहां तक कि एक बार तो पूर्वोत्तर के एक मुख्यमंत्री प्रेस वार्ता में यह कहते रो पड़े थे कि उन्हें भारतीय तक नहीं समझा जाता है।
बीते साल मई में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वोत्तर को 'हमारे विविधता के राष्ट्र में सबसे विशिष्ट क्षेत्र' बताया था। लेकिन दुखद तथ्य यह है कि कुछ ताकतें इन टिप्पणी को तूल देकर बात का बतंगड़ बना कर पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों के दिलों में विष वमन करने के लिए लगी रहती है । हालांकि कई बार इन राज्यों के लोग अक्सर नस्लीय भेदभाव का शिकार होते हैं लेकिन यह राज्य की कानून व्यवस्था से जुड़े मामले होते हैं जिन्हें नस्लीय भेदभाव से जोड़ कर अलगाव की फसल पैदा करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। कुछ समय पूर्व देहरादून में त्रिपुरा के छात्र अंजेल चकमा की हत्या कर दी गई थी।
इस घटना के दो महीने से भी कम समय बाद, अब दिल्ली में अरुणाचल प्रदेश की तीन महिलाओं को उनके पड़ोसियों ने कुत्सित शब्द ' धंधेवाली' से संबोधित किया और मोमो बेचने को कहा। यह दुर्भाग्यपूर्ण ही है कि उन्हें अपने ही देश में, और वह भी देश की राष्ट्रीय राजधानी में बेगाना करार दे दिया गया। विडंबना यह है कि यह अभद्रता किसी झगड़े या आवेश की प्रतिक्रिया नहीं थी बल्कि यह पहचान और जातीयता पर लक्षित हमला था। इस घटनाक्रम के बाद एक व्यक्ति और उसकी पत्नी पर धर्म, जाति व जन्मस्थान आदि के आधार पर कटुता फैलाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।
इसके अलावा अन्य आरोप भी लगाए गए हैं। निस्संदेह, इस दंपति के आपत्तिजनक व्यवहार ने एक गहरे जख्म को ही उजागर किया है, जो 'सबका साथ, सबका विकास' की अवधारणा को सिरे से खारिज करने वाली सोच है। साल 2014 में नीदो तानिया की हत्या से लेकर 2025 में अंजेल चकमा की हत्या तक, यह दुराग्रहों का सिलसिला साफ नजर आता है। अक्सर आरोप लगाये जाते रहे हैं कि पूर्वोत्तर के छात्रों व श्रमिकों को उनकी शारीरिक बनावट, खान-पान और भाषा के आधार पर निशाना बनाया जाता है। यह विडंबना ही है कि कुछ संकीर्ण लोग भारत की समृद्ध विविधता की विरासत का मर्म नहीं पहचानते हैं।
किसी राज्य की भौगोलिक स्थिति, जलवायु व सदियों से चली आ रही संस्कृति हमारे रूप-रंग-भाषा व व्यवहार का निर्धारण करती है। कोस-कोस पर भाषा-पानी बदलने वाले देश की यह विविधता इसकी खूबसूरती भी है। इसके मर्म का सम्मान करना व अंगीकार करना हर भारतीय का दायित्व भी है। पर्वतीय इलाकों का परिवेश व जलवायु व्यक्ति के सरल, सहज, सौम्य व्यवहार व कद-काठी का भी निर्धारण करती है। पूर्वोत्तर समाज में स्त्री प्रधान पारिवारिक व्यवस्था तथा सार्वजनिक जीवन में उसकी महती भूमिका को शेष देश के लोगों द्वारा संशय से देखा जाता है।
फलत परस्पर विश्वास की इस सामाजिक व्यवस्था में स्त्री की भूमिका को लेकर नकारात्मक धारणाएं गढ़ ली जाती हैं। यही वजह है कि पूर्वोत्तर के लोगों द्वारा आरोप लगाया जाता कि उनकी महिलाओं को शक की नजर से देखा जाता है और उन पर बिना किसी आधार के अनैतिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप तक लगाए जाते हैं। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने भी क्षेत्रीय पहचान को लेकर किए जाने वाले किसी भेदभाव के प्रति अक्सर चेताया है।
मौजूदा घटना क्रम में अरुणाचल प्रदेश की रहने वाली तीन युवतियां अपने किराए के फ्लैट में एसी लगवा रही थीं। इंस्टॉलेशन के दौरान ड्रिलिंग से उठी धूल-मिट्टी नीचे वाले फ्लैट की ओर गिर गई। नीचे रहने वाली पड़ोसी महिला ने इस पर आपत्ति जताई। शुरुआत में यह सामान्य पड़ोसी विवाद जैसा प्रतीत हो रहा था, लेकिन कुछ ही देर में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। आरोप है कि महिला ने गुस्से में युवतियों के खिलाफ नस्लीय और आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। इसी दौरान किसी ने पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।वायरल वीडियो में आरोपी महिला को कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए सुना और देखा जा सकता है।
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई यूजर्स ने इसे नस्लीय भेदभाव का मामला बताते हुए सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। पूर्वोत्तर भारत के नागरिकों के साथ भेदभाव को लेकर पहले भी बहस होती रही है, और इस घटना ने इस संवेदनशील मुद्दे को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।घटना के बाद पीड़ित युवतियों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। शुरुआती जांच में वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया। जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि मामले में अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं भी लागू हो सकती हैं।
इसके बाद केस में इन प्रावधानों को जोड़ा गयाजांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस ने आरोपी महिला, जिसकी पहचान रूबी जैन के रूप में हुई है, को गिरफ्तार कर लिया। दिल्ली पुलिस ने जांच के दौरान एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराएं आरोपी के खिलाफ जोड़ी हैं.पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद पूछताछ जारी है और मामले की जांच एसीपी स्तर के अधिकारी की निगरानी में की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो के अलावा अन्य साक्ष्यों की भी बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाई जा सके।इस मामले में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू समेत ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी मामले में प्रतिक्रिया व्यक्त कर दुख जताया है। सब समूचे सभ्य समाज की अवधारणा कुछ इने गिने नासमझ लोगों की टिप्पणी से नहीं आंकी जानी चाहिए हम उत्तर से पूर्वोत्तर दक्षिण से पश्चिम तक एक है एक रहेंगे और भविष्य में ऐसी कोई घटना नहीं होनी चाहिए।

Comments