झारखंड निकाय चुनाव- 2026, हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल ने किया मतदान

लोकतंत्र के अधिकार का उपयोग करें, वोट जरूर करें, नगर निकायों में सुशासन और विकासयुक्त शासन स्थापित करें : मनीष जायसवाल

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हजारीबाग, झारखंड:- हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के बीजेपी सांसद मनीष जायसवाल ने झारखंड नगर निकाय चुनाव-2026 के दौरान लोकतंत्र के महापर्व में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की और सुबह ही अपने बूथ पर पहुंचकर मतदान किया। सांसद मनीष जायसवाल ने हजारीबाग नगर निगम के वार्ड संख्या 27 स्थित मुनका बगीचा धर्मशाला ( दक्षिणी भाग) में बालिका मध्य विद्यालय, कुम्हारटोली अवस्थित अपने बूथ संख्या 04 पर पहुंचे, जहां मतदान से पूर्व की सारी प्रक्रिया पूरी कर लोकतंत्र के स्पर्म में अपने मत का उपयोग किया। सांसद मनीष जायसवाल  स्काई ब्लू रंग के कुर्ते में बूथ पर पहुंचे।
 
यहां उन्होंने मतदान करने पहुंचे कई लोगों से मिलकर उनका आभार जताया। मौके पर हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल ने झारखंड के सभी जिलों के मतदाताओं से अपील किया अपने-अपने घरों से निकलकर लोकतंत्र के अधिकार का उपयोग करें, वोट जरूर दें और अपने पसंद का नगर की सरकार चुनकर अपने नगर निकायों में सुशासन और विकास युक्त शासन स्थापित करें। यहां मीडिया से रूबरू होते हुए सांसद मनीष जायसवाल ने कहा कि नगर की सरकार का गठन होने जा रहा है। यह हमारे दैनिक जीवन की आधारशिला है।
 
हमारी सुबह की स्वच्छता से लेकर, रात की स्ट्रीट लाइट और घर की नल में आने वाले पेयजल तक सब कुछ इसी नगर निकाय से संचालित होता है। इसलिए नगर के सर्वांगीण विकास और सुशासन के लिए आपका घर से निकलकर बूथ तक पहुँचना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी सशक्त होगा, जब इसके सभी स्तंभ पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ अपनी भूमिका निभाएंगे। सांसद मनीष जायसवाल ने यह भी कहा कि आज मतदान के दौरान मैंने एक व्यक्तिगत विडंबना का अनुभव किया। चुनाव आयोग के वोटर लिस्ट प्रबंधन की त्रुटि के कारण आज मेरे ही परिवार का विभाजन हो गया। मेरा संपूर्ण परिवार वार्ड संख्या 28 में है, जबकि मुझे अकेला वार्ड संख्या 27 में डाल दिया गया।
 
यह अत्यंत चिंता का विषय है कि एक ही घर दो अलग-अलग वार्डों में कैसे हो सकता है? अमूमन मतदान एक पारिवारिक उत्सव होता है जहाँ पूरा परिवार एक साथ वोट देने निकलता है। लेकिन आज जब मैं अकेला वोट देने निकला, तो मन में यह मलाल था कि ऐसा प्रशासनिक बंटवारा उचित नहीं है। यदि एक जनप्रतिनिधि के साथ ऐसी त्रुटि हो सकती है, तो आम जनमानस को अपने बूथ ढूंढने में कितनी कठिनाई हो रही होगी, इसका अंदाज़ा सहज ही लगाया जा सकता है। मेरा जिम्मेवार अधिकारियों से यह विनम्र आग्रह है कि भविष्य में वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण को और अधिक संजीदगी और सूक्ष्मता से किया जाए, ताकि किसी भी मतदाता को अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करने में असुविधा न हो।

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