असम विश्वविद्यालय में ड्रोन प्रौद्योगिकी एवं अनुप्रयोग पर पाँच दिवसीय शिविर संपन्न

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श्रीभूमि- असम विश्वविद्यालय में ड्रोन प्रौद्योगिकी एवं उसके अनुप्रयोग विषय पर पाँच दिवसीय 23वाँ शिविर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। विश्वविद्यालय के कृषि अभियंत्रण विभाग, थ्री-डी प्रिंटिंग प्रयोगशाला तथा उद्यम विकास केंद्र के सहयोग से आयोजित इस शिविर का आयोजन नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, सिलचर द्वारा किया गया। कार्यक्रम को जेट एयरोस्पेस एविएशन रिसर्च सेंटर तथा प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र आईएचएफसी का प्रायोजन प्राप्त था।
 
17 से 21 फरवरी तक आयोजित इस शिविर के उद्घाटन सत्र में कृषि अभियंत्रण विभाग की प्रमुख डॉ. अजीता तिवारी ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि तीव्र गति से विकसित हो रही मानव रहित हवाई यान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तकनीकी दक्षता बढ़ाने और नवाचार की भावना विकसित करने के लिए यह पाँच दिवसीय बूटकैंप एक महत्वपूर्ण पहल है। कार्यक्रम के दौरान मानव रहित हवाई यान प्रणाली, ड्रोन डिजाइन, संचालन, नियामक प्रावधानों तथा व्यावहारिक उपयोग पर प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
 
विशेष रूप से बीटेक और एमटेक विद्यार्थियों की तकनीकी क्षमता को सुदृढ़ करना तथा उभरती ड्रोन तकनीक में नवाचार को प्रोत्साहित करना इसका मुख्य उद्देश्य रहा। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कुलपति प्रोफेसर राजीव मोहन पंथ उपस्थित थे। उन्होंने युवाओं में उद्यमशीलता की भावना और नवीन अनुसंधान दृष्टिकोण के विकास के लिए ऐसे कार्यक्रमों की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं का कौशल विकास आत्मनिर्भर भारत की प्रमुख प्रेरक शक्ति है और विद्यार्थियों को अपनी सृजनात्मकता तथा दक्षता को सार्थक पहल में रूपांतरित करने का आह्वान किया।
 
ड्रोन एवं संबद्ध प्रौद्योगिकी केंद्र की समन्वयक प्रोफेसर शाहीन आरा बेगम ने ड्रोन संबंधी सरकारी नीतियों और युवाओं के लिए इसके संभावनाशील क्षेत्रों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर त्रिगुणा सेन प्रौद्योगिकी विद्यालय के अधिष्ठाता प्रोफेसर सुदीप्त राय, एनआईटी के डॉ. रणजय हाजरा, डॉ. मुरुगन आर तथा डॉ. बादल सोनी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। संपूर्ण कार्यक्रम का समन्वयन असम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर देवमाल्य घोष और डॉ. अजीता तिवारी ने किया।
 
सहयोगी संस्थानों के विशेषज्ञों ने ड्रोन की संरचना, नियंत्रण प्रणाली, पेलोड एकीकरण तथा कृषि, निगरानी, मानचित्रण और आपदा प्रबंधन में इसके उपयोग पर तकनीकी सत्र संचालित किए। प्रतिभागियों को ड्रोन असेंबली, कैलिब्रेशन और उड़ान संचालन का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त हुआ। यह पहल उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कौशल विकास, शोध सहयोग और क्षमता निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो भारत के विकसित हो रहे ड्रोन पारितंत्र को और सुदृढ़ करेगी।

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