श्रद्धा के बिना भक्ति अधूरी, गुरु की शरण से मिलता है ज्ञानः ज्योति किशोरी

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सिद्धार्थनगर,भनवापुर क्षेत्र के कमसार गांव के राम जानकी मंदिर परिसर में चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन शनिवार शाम को श्रीधाम वृंदावन से पधारी  देवी ज्योति किशोरी जी ने श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ में कथा का शुभारंभ करते हुए श्रद्धालुओं को श्रद्धा और विश्वास का अमूल्य संदेश दिया। उन्होंने कहा कि श्रद्धा के अभाव में ज्ञान कभी स्थायी नहीं हो सकता। जब तक हृदय में अटूट विश्वास न हो, तब तक आध्यात्मिक ज्ञान भी मन में टिक नहीं पाता।
 
कथावाचन के दौरान उन्होंने सती मोह का मार्मिक प्रसंग सुनाया। प्रसंग में बताया गया कि जब माता सती ने भगवान श्रीराम की परीक्षा लेने का प्रयास किया, तब उन्हें उसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़े। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया कि ईश्वर पर किया गया संदेह मनुष्य को अशांति और भ्रम की ओर ले जाता है।देवी ज्योति किशोरी जी ने कहा कि सती माता का प्रसंग हमें यह शिक्षा देता है कि अपने आराध्य और गुरु के वचनों पर कभी संशय नहीं करना चाहिए। जहां श्रद्धा होती है, वहीं भक्ति फलित होती है और जीवन में शांति का वास होता है।
 
कथा के दौरान उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की प्रसिद्ध चौपाई “होइहि सोई जो राम रचि राखा” का उल्लेख करते हुए समझाया कि संसार में जो कुछ भी घटित होता है, वह ईश्वर की इच्छा से ही होता है। मनुष्य को परिस्थितियों में विचलित होने के बजाय प्रभु की लीला पर विश्वास रखना चाहिए।कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए। भजनों और मंगल ध्वनि से वातावरण भक्तिमय हो उठा। अंत में आरती के साथ श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।इस अवसर पर आचार्य दुर्गेश शुक्ल,विनय तिवारी,सचिन तिवारी,शिवा विश्वकर्मा,लक्ष्मी नारायण ,उर्दू बाबा,राजेंद्र यादव,अनिल त्रिपाठीआदि लोग मौजूद रहे।

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