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सरकारी जमीन पर बनी कोठी हाथ में चुड़ी पहन अधिकारी भूमाफिया पर कार्यवाही को काट रहे कन्नी
डीएम को शिकायती पत्र देकर मामले को कराया अवगत फिर भी तहसीलदार द्वारा किया जा रहा टालमटोल, दबंगों के हौसले हुए बुलंद सरकारी जमीन पर कब्ज़ा कर तहसील प्रशासन को किया अपंग,खलिहान की जमीन खाली कराने में तहसील प्रशासन को छूट रहे पसीने
बस्ती। जिले के हरैया तहसील अंतर्गत राजस्व ग्राम बैरहना में खलिहान और गड्ढे की सरकारी भूमि पर दबंगों द्वारा अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद तहसील प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे भू-माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।ग्रामीणों के अनुसार, राजस्व अभिलेख में दर्ज आराजी गाटा संख्या 42 (खलिहान) तथा गाटा संख्या 43 (गड्ढा) सार्वजनिक उपयोग की भूमि है।
प्राप्त समाचार के अनुसार शिकायतकर्ता बुद्ध सागर पांडे ने डीएम को लिखित शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया कि गांव के हरिश्चंद्र पांडे पुत्र राम मनोरथ एवं राज नारायण पांडे पुत्र त्रिलोकी ने सरकारी भूमि पर जबरन कब्जा कर मकान का निर्माण करा लिया है। तहसील प्रशासन हाथो में चुड़ी पहन कर और शारीरिक रूप से अपंग नजर आ रहा है ।सरकारी जमीन पर बने करोड़ो रुपए की कोठी पर प्रशासन द्वारा कार्यवाही करने से कन्नी काट रहे है।
पूर्व लेखपाल और राजस्व निरीक्षक की मिलीभगत से अवैध निर्माण को संरक्षण दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद तहसीलदार स्तर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और मामला दबाने का प्रयास किया गया।शिकायतकर्ता बुद्धि सागर पांडे पुत्र राम गणेश पांडे ने बताया कि उन्होंने 08 जुलाई 2020 को इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी (शिकायत संख्या 40018520012628)।
इसके अलावा जिलाधिकारी कार्यालय और मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी कई बार प्रार्थना पत्र दिया गया,लेकिन अब तक न तो कब्जा हटाया गया और न ही भूमि को पूर्व स्थिति में बहाल किया गया।ग्रामीणों में प्रशासन की कार्यशैली को लेकर आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि एक सप्ताह के भीतर अवैध कब्जा नहीं हटाया गया तो वे जिलाधिकारी को पुनः सामूहिक शिकायत देकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।ग्रामीणों ने मांग की है कि जिलाधिकारी स्तर से जांच कराकर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए तथा खलिहान और गड्ढे की सार्वजनिक भूमि को तत्काल खाली कराया जाए,ताकि गांव के आम लोगों को उनका वैधानिक अधिकार मिल सके।

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