'अभी तक सो रहे थे क्या?' आईएनएस शिकरा के पास 23 मंजिला इमारत बन कैसे गई, नौसेना अधिकारियों पर भड़का हाईकोर्ट

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ब्यूरो प्रयागराज। बंबई हाईकोर्ट ने बुधवार को नौसेना के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कड़ी नाराजगी व्यक्त की है. मामला दक्षिण मुंबई स्थित नौसेना के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण अड्डे आईएनएस शिकरा (INS Shikara) के पास बन रही एक बहुमंजिला इमारत से जुड़ा है. अदालत ने सुरक्षा के नाम पर देर से जागी नौसेना से पूछा कि जब उनके नाक के नीचे इतना बड़ा निर्माण कार्य चल रहा था, तब वे क्या कर रहे थे.

न्यायमूर्ति रविंद्र घुगे और न्यायमूर्ति अभय मंत्री की पीठ ने आईएनएस शिकरा के कमांडिंग ऑफिसर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान अधिकारियों को आड़े हाथों लिया. जब नौसेना ने इस 23 मंजिला इमारत को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक ‘गंभीर जोखिम’ बताया, तो अदालत ने पलटवार करते हुए पूछा, “जब 23 मंजिला इमारत बन रही थी, तो क्या आप सो रहे थे?”.

नौसेना ने याचिका में दावा किया है कि यह निर्माण परियोजना संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठान की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है. खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि अंतिम सुनवाई के बाद इमारत को सुरक्षा के लिए खतरा माना गया, तो उसे गिराने का आदेश भी दिया जा सकता है.

अदालत ने इस बात पर हैरानी जताई कि जो निर्माण कार्य 2021 में शुरू हुआ था, उसे रोकने के लिए नौसेना इतने सालों बाद अब याचिका लेकर आई है. न्यायमूर्ति घुगे ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि नौसेना को अपने सैन्य अड्डों के आसपास के क्षेत्र की नियमित निगरानी करनी चाहिए थी ताकि ऐसे निर्माण कार्य शुरू ही न हो सकें.

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इससे पहले, सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुंबई दौरे को देखते हुए हाईकोर्ट ने सुरक्षा संबंधी तत्काल चिंताओं के आधार पर निर्माण कार्य पर अस्थायी रोक लगा दी थी. हालांकि, बुधवार की सुनवाई में अदालत का रुख प्रशासन की ढिलाई पर अधिक केंद्रित रहा. नौसेना के वकील आर.वी. गोविलकर ने दलील दी कि उस विशिष्ट क्षेत्र में केवल 53.07 मीटर तक की ऊंचाई के निर्माण की अनुमति है.

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नौसेना का पक्ष रख रहे अधिवक्ता आर.वी. गोविलकर ने बुधवार को कहा कि उस क्षेत्र में 53.07 मीटर तक निर्माण की अनुमति है.उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि नौसेना के अधिकारियों को अधिक सतर्क रहना चाहिए था.

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पीठ ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा चिंताएं अपनी जगह हैं, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने संकेत दिया कि वह 53.07 मीटर की स्वीकृत ऊंचाई तक निर्माण की अनुमति देने वाला अंतरिम आदेश जारी कर सकता है. फिलहाल मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार के लिए तय की गई है.

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