राजनीति
विकास का विराट विजन : समृद्ध गुजरात की ओर निर्णायक कदम
जनकल्याण, औद्योगिक विस्तार और भविष्य की तैयारी का संतुलित एवं दूरदर्शी बजट
गुजरात सरकार द्वारा प्रस्तुत नवीन बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि विकसित और आत्मनिर्भर गुजरात की एक स्पष्ट रूपरेखा है। चार लाख करोड़ रुपये से अधिक के इस विशाल बजट में विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 65 प्रतिशत राशि पूंजीगत एवं विकासात्मक कार्यों पर व्यय करने का निर्णय राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। शेष राशि पेंशन, वेतन और ब्याज जैसे आवश्यक दायित्वों पर नियोजित की गई है, जिससे वित्तीय अनुशासन और सामाजिक संतुलन दोनों का समन्वय स्थापित होता है। यह बजट दूरदर्शिता, समावेशिता और संतुलित प्रगति का उत्कृष्ट उदाहरण है।
सरकार ने ज्ञान( gyan)के सूत्र के माध्यम से गरीब, युवा, अन्नदाता और नारीशक्ति को केंद्र में रखकर योजनाओं का निर्माण किया है। गरीब परिवारों के लिए तीन लाख से अधिक आवासों का निर्माण, प्रधानमंत्री आवास सहित विभिन्न योजनाओं में सहायता राशि को बढ़ाकर 1.70 लाख रुपये करना सामाजिक सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह निर्णय केवल घर बनाने का नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन देने का प्रयास है।
राज्य की 36 प्रतिशत युवा आबादी को ध्यान में रखते हुए छात्रवृत्ति के लिए 4,827 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। समरस कुमार और कन्या छात्रालयों के निर्माण से हजारों विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। लगातार दूसरे वर्ष शिक्षा को सर्वाधिक प्राथमिकता देना इस बात का प्रमाण है कि सरकार भविष्य की नींव मजबूत कर रही है। प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में संरचनात्मक सुधार, नई कॉलेजों की स्थापना, खेल सुविधाओं का विस्तार तथा स्वावलंबन योजनाओं के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सार्थक पहल की गई है।
किसानों के लिए दिन में बिजली उपलब्ध कराने हेतु अतिरिक्त आवंटन, किसान क्रेडिट कार्ड पर ब्याज राहत और आधुनिक उपकरणों की खरीद के लिए वित्तीय सहायता कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाएगी। सिंचाई और जल प्रबंधन के लिए हजारों करोड़ रुपये की व्यवस्था राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिरता और मजबूती प्रदान करेगी। यह बजट स्पष्ट करता है कि सरकार किसान और ग्रामीण विकास को विकास की धुरी मानती है।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में ‘सखी साहस’ योजना, कार्यशील महिला छात्रावासों का निर्माण और आर्थिक सहायता की व्यवस्था महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान करेगी। यह सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक प्रेरक कदम है।
औद्योगिक विकास इस बजट की प्रमुख विशेषता है। गुजरात इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को आधुनिक तकनीक से लैस कर स्मार्ट बनाने का निर्णय उद्योगों के लिए नई संभावनाएं खोलेगा। टेक्सटाइल उद्योग के लिए 2,755 करोड़ रुपये का प्रावधान विशेष रूप से सराहनीय है, जिससे सूरत जैसे टेक्सटाइल हब को नई गति मिलेगी। एमएसएमई के लिए आत्मनिर्भर गुजरात योजना के अंतर्गत व्यापक सहायता से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल की स्थापना से वैश्विक बाजार में राज्य की उपस्थिति और सशक्त होगी।
धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 2026 को पर्यटन वर्ष घोषित करना अत्यंत दूरदर्शी निर्णय है। सोमनाथ मंदिर को ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की पहल, साथ ही अंबाजी मंदिर, गिरनार पर्वत और लोथल जैसे स्थलों के विकास की योजनाएं सांस्कृतिक विरासत को आर्थिक शक्ति में बदलने का प्रयास हैं। इससे स्थानीय रोजगार, होटल उद्योग और परिवहन क्षेत्र को भी व्यापक लाभ मिलेगा।
शहरी विकास में 17 प्रतिशत की वृद्धि कर नगरपालिकाओं और महानगरों को सुदृढ़ आधार प्रदान किया गया है। पांच नए सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की घोषणा संतुलित शहरीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। स्मार्ट पार्किंग, दैनिक जलापूर्ति और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार शहरों को आधुनिक स्वरूप देगा। सूरत मेट्रो लाइन-2 के विस्तार के लिए आवंटित राशि से शहर को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी। इससे मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी मजबूत होगी और यात्रियों को समय व लागत की बचत होगी।
खेलकूद का बजट 155 प्रतिशत तक बढ़ाना राज्य की महत्वाकांक्षी सोच को दर्शाता है। अहमदाबाद को ओलंपिक रेडी सिटी बनाने का संकल्प और अंतरराष्ट्रीय स्तरीय खेल परिसरों के निर्माण का प्रावधान युवाओं में खेल संस्कृति को बढ़ावा देगा। यदि भविष्य में कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे वैश्विक आयोजन गुजरात में होते हैं, तो राज्य की वैश्विक पहचान और सुदृढ़ होगी।स्वास्थ्य क्षेत्र में भी व्यापक निवेश किया गया है। सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों के विकास, सिविल अस्पतालों में सुविधाओं के विस्तार और चिकित्सा शिक्षा के सुदृढ़ीकरण से आमजन को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होंगी। यह सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार तैयार करता है।
राज्य की वित्तीय स्थिति भी संतुलित और अनुशासित दिखाई देती है। राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के नियंत्रित स्तर पर है और सार्वजनिक ऋण अनुपात में कमी दर्शाती है कि सरकार विकास और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाए हुए है। पूंजीगत व्यय में वृद्धि दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती का संकेत है।
कुल मिलाकर यह बजट केवल वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं करता, बल्कि भविष्य के गुजरात की नींव रखता है। गरीबों के लिए आवास, युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार, किसानों के लिए राहत, महिलाओं के लिए सशक्तिकरण, उद्योगों के लिए प्रोत्साहन और शहरों के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचा इन सभी पहलुओं को समेटे यह बजट विकास का व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। यह एक ऐसा रोडमैप है, जो गुजरात को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है। जनता को विश्वास है कि यह सपना शीघ्र ही साकार होगा और गुजरात प्रगति की नई इबारत लिखेगा।
कांतिलाल मांडोत

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