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Vande Mataram New Guideline: विवादित पंक्तियां जो पहले हटाई गई थीं, अब फिर जोड़ी गईं
अब तक केवल इसके पहले दो अंतरे ही गाए जाते थे, क्योंकि बाकी हिस्सों को लेकर आज़ादी से पहले विवाद हुआ था। पहले क्यों हटाए गए थे बाकी अंतरे?
केंद्र सरकार ने देश के राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। नए निर्देशों के अनुसार अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और सार्वजनिक आयोजनों में वंदे मातरम् के सभी छह अंतरे गाए जाएंगे। इसकी कुल अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड होगी।

बंकिम चंद्र चटर्जी (फाइल फोटो)
🔹 पहले क्यों हटाए गए थे बाकी अंतरे?
बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित वंदे मातरम् (1870) को उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया था। यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोकप्रिय हुआ।
लेकिन इसके कुछ अंतरों में भारत को देवी दुर्गा के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिससे विवाद पैदा हुआ।
मुस्लिम नेताओं का कहना था कि—
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गीत में देवी-पूजा का उल्लेख है
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यह इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ है
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देश को दुर्गा के रूप में दिखाया गया है
इसी वजह से इसका विरोध शुरू हुआ।
🔹 कौन-सी पंक्तियां बनी थीं विवाद की वजह?
विवादित हिस्सों में ये पंक्तियां शामिल थीं:
"बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीम्,
रिपुदलवारिणीं मातरम्…"
"तुमि विद्या तुमि धर्म…
तोमारेई प्रतिमा गड़ि मन्दिरे-मन्दिरे…"
"त्वम् हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी…"
इन पंक्तियों में मातृभूमि को दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती जैसी देवियों से जोड़ा गया है।

🔹 1937 की कमेटी ने क्या फैसला किया था?
विवाद बढ़ने पर कांग्रेस ने 1937 में एक समिति बनाई, जिसमें शामिल थे—
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रवींद्रनाथ टैगोर
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सुभाष चंद्र बोस
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मौलाना आज़ाद
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जवाहरलाल नेहरू
समिति का निष्कर्ष:
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पहले दो अंतरे देशभक्ति और मातृभूमि की प्रशंसा पर आधारित हैं
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बाद के अंतरे धार्मिक प्रतीकों से जुड़े हैं
👉 इसलिए तय किया गया कि सिर्फ पहले दो अंतरे ही राष्ट्रगीत के रूप में गाए जाएंगे।
🔹 आज़ादी के बाद क्या हुआ?
इसके बावजूद मुस्लिम लीग संतुष्ट नहीं हुई। मोहम्मद अली जिन्ना ने 1938 में इसे पूरी तरह हटाने की मांग की थी।
लेकिन—
📌 24 जनवरी 1950 को
राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संविधान सभा में वंदे मातरम् को राष्ट्रगीत के रूप में स्वीकार करने की घोषणा की।
तब से इसके पहले दो अंतरे ही प्रचलन में रहे।
🔹 नई गाइडलाइन में क्या बदला?
नई सरकारी गाइडलाइन के अनुसार—
✅ अब सभी 6 अंतरे गाए जाएंगे
✅ यदि ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम्’ दोनों हों, तो पहले वंदे मातरम् होगा
✅ स्कूलों और सरकारी कार्यक्रमों में अनिवार्य प्रस्तुति होगी
इस तरह, वर्षों बाद पहले हटाए गए अंतरों को फिर से आधिकारिक मान्यता दी गई है।
🔹 क्यों है यह फैसला अहम?
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यह फैसला सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है
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ऐतिहासिक विवाद पर नया दृष्टिकोण दिखाता है
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राष्ट्रगीत को उसके मूल स्वरूप में प्रस्तुत करता है
हालांकि, इसे लेकर आगे राजनीतिक और सामाजिक बहस भी संभव है।

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