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वैश्विक भय की चमक: क्यों रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं सोना और चांदी
[मुद्राओं की कमजोरी और सोना-चांदी का बढ़ता प्रभुत्व] [संकट की भाषा बोलती चमक: सोना और चांदी का नया दौर]
प्रो. आरके जैन “अरिजीत”
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव इस तेजी की सबसे बड़ी वजह बनकर उभरे हैं। अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध की नई परतें यूरोप की राजनीतिक अस्थिरता मध्य पूर्व में लगातार सुलगते संघर्ष और लैटिन अमेरिका के संकट ने वैश्विक बाजारों में भय का वातावरण बना दिया है। निवेशक अब यह मानने लगे हैं कि आने वाला समय टकराव और अनिश्चितता से भरा हो सकता है। ऐसे माहौल में जोखिमपूर्ण परिसंपत्तियां आकर्षण खो देती हैं। पूंजी स्वभाव से ही डरपोक होती है और खतरे की आहट मिलते ही सुरक्षित ठिकानों की ओर भागती है। सोना और चांदी इसी डर का स्वाभाविक आश्रय बनते हैं। यह तेजी बताती है कि दुनिया स्थिरता नहीं बल्कि सुरक्षा खोज रही है।
केंद्रीय बैंकों की रणनीति ने इस प्रवृत्ति को और मजबूती प्रदान की है। जब देश अपनी मुद्रा और आर्थिक संप्रभुता को लेकर चिंतित होते हैं तब वे सोने की ओर लौटते हैं। बड़े पैमाने पर सोने की खरीद केवल निवेश नहीं बल्कि एक रणनीतिक संदेश होती है। यह संकेत देता है कि वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में तनाव बढ़ सकता है। जब केंद्रीय बैंक सोने को प्राथमिकता देते हैं तब बाजार को यह स्पष्ट संदेश मिलता है कि भविष्य में मुद्रा जोखिम गहरा सकता है। आम निवेशक भी इस संकेत को समझता है और उसी दिशा में कदम बढ़ाता है। इस सामूहिक विश्वास से कीमतें केवल मांग के कारण नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक मजबूती के कारण भी बढ़ती हैं।
चांदी की तेजी इस पूरी कहानी में एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ती है। यह धातु अब केवल सुरक्षित निवेश का साधन नहीं रही बल्कि आधुनिक तकनीकी विकास की अनिवार्य जरूरत बन चुकी है। सौर ऊर्जा इलेक्ट्रिक वाहन डिजिटल उपकरण और औद्योगिक उत्पादन में चांदी की मांग तेजी से बढ़ रही है। वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन ने इसकी उपयोगिता को कई गुना बढ़ा दिया है। दूसरी ओर आपूर्ति सीमित है जिससे कीमतों पर दबाव स्वाभाविक रूप से बढ़ता है। निवेशक अब चांदी को केवल संकट में सुरक्षा नहीं बल्कि भविष्य के विकास का माध्यम भी मान रहे हैं। यही दोहरी भूमिका इसकी कीमतों को और अधिक अस्थिर लेकिन आकर्षक बना रही है।
आर्थिक अनिश्चितता और मौद्रिक नीतियों की दुविधा ने इस उछाल को और गहराई दी है। मुद्रास्फीति की मार और ब्याज दरों को लेकर असमंजस ने कागजी मुद्रा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब लोगों को लगता है कि उनकी मुद्रा धीरे धीरे मूल्य खो रही है तब वे ठोस संपत्तियों की ओर रुख करते हैं। सोना और चांदी इस संदर्भ में मूल्य संरक्षण का सबसे पुराना और भरोसेमंद साधन माने जाते हैं। यह केवल आर्थिक गणना नहीं बल्कि मानसिक सुरक्षा की तलाश है। लोग भविष्य को लेकर चिंतित हैं और वर्तमान में अपने धन को सुरक्षित रखना चाहते हैं। यही भावना इस रिकॉर्ड तेजी की असली ऊर्जा बन चुकी है।
भारतीय बाजार में इस तेजी का प्रभाव केवल निवेश तक सीमित नहीं है बल्कि सामाजिक जीवन को भी गहराई से प्रभावित कर रहा है। सोना भारतीय संस्कृति में केवल धातु नहीं बल्कि परंपरा और भावनाओं का प्रतीक है। शादी विवाह और त्योहारों से जुड़ी उम्मीदें अब महंगाई की दीवार से टकरा रही हैं। आम परिवार के लिए आभूषण खरीदना पहले से कहीं अधिक कठिन हो गया है। इसके बावजूद निवेश के स्तर पर यह समय अवसर भी प्रस्तुत करता है। डिजिटल गोल्ड सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और अन्य वित्तीय विकल्पों ने निवेश को पहले से अधिक सुलभ बना दिया है। लोग धीरे धीरे भौतिक संग्रह से अधिक वित्तीय सुरक्षा की ओर बढ़ रहे हैं।
हालांकि इतनी ऊंची कीमतों पर निवेश करते समय सावधानी अनिवार्य हो जाती है। बाजार भावनाओं से चलता है और भावनाएं तेजी से बदल सकती हैं। वैश्विक तनाव यदि किसी मोड़ पर कम होता है तो कीमतों में उतार चढ़ाव भी आ सकता है। इसलिए विवेक संतुलन और दीर्घकालिक दृष्टि सबसे जरूरी है। सोना और चांदी को त्वरित लाभ के साधन की बजाय सुरक्षा कवच के रूप में देखना अधिक उचित होगा। यह समय लालच से अधिक समझदारी की परीक्षा है। जो निवेशक भावनाओं के बजाय रणनीति के साथ कदम रखेंगे वही इस दौर से लाभ उठा पाएंगे।
समग्र रूप से देखा जाए तो सोना और चांदी की यह ऐतिहासिक चमक बाजार का संयोग नहीं बल्कि समय की चेतावनी है। यह बताती है कि वैश्विक व्यवस्था भीतर से अस्थिर है और भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है। जब दुनिया आश्वस्त होती है तब जोखिम आकर्षक लगते हैं और जब दुनिया डगमगाती है तब सुरक्षा की चमक बढ़ जाती है। आज वही दौर चल रहा है। यह तेजी संकट की गहराई को भी दर्शाती है और अवसर की संभावना को भी। निवेशकों के लिए यह समय धैर्य विवेक और दूरदृष्टि का है। सोना और चांदी आज केवल आभूषण या निवेश नहीं बल्कि वैश्विक मनोदशा के सबसे सशक्त संकेतक बन चुके हैं।

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