जो व्यक्ति नशे के दर का होता है, वह हमेशा दर-बदर का होता है

जो व्यक्ति नशे के दर का होता है, वह हमेशा दर-बदर का होता है

रायपुर, नव छत्तीसगढ़ साहित्यिक,सांस्कृतिक संस्थान रायपुर छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में नशे के विरोध में "नशे की संगति जीवन की बड़ी विपत्ति"" विषय पर   सारगर्भित वैचारिक,साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन वृंदावन हॉल सिविल लाइंस रायपुर में किया गया किया गया ।जिसके मुख्य अतिथि  श्री राजीव चंद्र श्रीवास्तव पूर्व आईपीएस, , अध्यक्ष संजीव कुमार ठाकुर, चिंतक, लेखक, कवि, स्तंभकार, विशिष्ट अतिथि जयंत थोराट, पूर्व आई,पी,एस,शताब्दी पांडे कवयित्री कथा सामाजिक कार्यकर्ता, मनोज मसंद, कवि तथा सामाजिक कार्यकर्ता,  और एम के गौतम पूर्व संचालक फोरेंसिक प्रयोगशाला,कवि अम्बर शुक्ल छत्तीसगढ़ थे।
 
कार्यक्रम का संचालन शशांक खरे ने किया, सरस्वती वंदना कवयित्री सुषमा पटेल और संयोजन पल्लवी रूमा झा ने किया, कार्यक्रम की परिकल्पना सुमन शर्मा वाजपेई ने की। नशे के विरोध में काव्य गोष्ठी का संचालन कवि सुनील पांडे ने किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए चिंतक लेखक कवि संजीव ठाकुर ने कहा नशा देश समाज और व्यक्ति के लिए अभिशाप का एक भयानक संदेश है। व्यसन देश और समाज के लिए नैतिक पतन का कारण भी बना है। उन्होंने अपनी कविता में भी कहा "व्यक्ति नशे के दर पर  होता है,  वह  हमेशा दर-बदर का होता है। 
 
उन्होंने कहा जिस सामाज ने नशे को प्रश्रय दिया वह उसके पतन का भयानक कारण बना है। नशा देश की सामाजिक आर्थिक एवं अन्य संस्थागत संरचनाओं को खोखला कर रहा है। युवाओं को अधिक भ्रमित कर उनके भविष्य को नष्ट करने का कार्य भी करता है। युवाओं को नशे से सदैव दूर रहकर राष्ट्रीय हित में कार्य करना चाहिए। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि नशे के विरोध में आदिकाल से ही हमारे वेदों पुराणों में उल्लेख होता आया है और नशा एक सामाजिक बुराई, विडंबना तथा बड़ी आपदा है।
 
नशे के विरोध में जन सामान्य से लेकर संस्थाओं कॉलेज स्कूलों में एक अभियान छेड़ा जाना चाहिए जिससे राष्ट्र  नशे से चाहे वह सूखा या गीला नशा हों मुक्त हो सके। नशे से जीवन में नैतिक पतन भी होता है। उन्होंने कहा मानव सभ्यता के साथ नशे का इतिहास भी लगभग उतना ही पुराना है जितना स्वयं समाज। इतिहास साक्षी है कि जहाँ नशे का प्रवेश हुआ, वहाँ सामाजिक, नैतिक और आध्यात्मिक पतन की छाया भी गहराने लगी। पूर्व आईपीएस व डीजीपी राजीव श्रीवास्तव नशे को महामारी बताते हुए इसके विरोध में एक जन अभियान चलाने की अपील की है।
 
उन्होंने कहा अपनी सर्विस में संकल्पित होकर नशे के विरुद्ध अभियान सदैव चलाया था उन्होंने कहा कि नशे को किसी भी कीमत पर परिवार या समाज को हल्के से नहीं लिया जाना नहीं चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता,कवयित्री श्रीमती शताब्दी पांडे ने कहा समाज में स्त्रियों की भी इस संदर्भ में नशा को दूर करने में एक महती एवं बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है यदि माताएं अपने आने वाली पीढ़ी को नशे के विरोध में दिशा दें तो राष्ट्र हर कीमत में महान हो सकता है और नशा मुक्त भी हो सकता है इस अभियान में माता बहनों तथा स्त्री शक्ति का बहुत ज्यादा सक्रियता से अपनी भूमिका का निर्वहन करना होगा। उन्होंने इस संदर्भ में अपनी कविता भी सुनाइ।
 
डॉ एम,के गौतम पूर्व निदेशक फोरेंसिक प्रयोगशाला रायपुर ने कहा कि नशे के ऐसे कई प्रकरण हमने देखे जिम नशे के कारण उनकी न सिर्फ जिंदगी बर्बाद हुई वरना पूरा परिवार बर्बादी के कगार पर खड़ा हो गया है।पूर्व पुलिस महानिरीक्षक जयंत थोराट ने नशे के खिलाफ अपने अभिमत रखें, कवि अंबर शुक्ला ने अपनी बात गद्य और पद्य में रखी। डॉ सुरेश तिवारी, चेतन भारती,डॉक्टर कर्नल चारु चंद्र दीवान डॉ मनीष श्रीवास्तव विशेष रूप से उपस्थित थे।
 
दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन कि अध्यक्षता वरिष्ठ कवि संजीव कुमार ठाकुर ने की विशिष्ट अतिथि राज कुमार धर द्विवेदी,शोभा मोहन श्रीवास्तव, मनोज मसंद, डॉ बिना रागी,और अंबर शुक्ला रहे में , अभिषेक शर्मा ,कवि ऋषभदेव साहू ,भूपेंद्र शर्मा, राजकुमार धर द्विवेदी, मोहन शोभा मोहन  श्रीवास्तव, नितेश ठाकुर शोभा देवी शर्मा, यशवंत यदु, अनीता दुबे, शकुंतला तरार, देवाशीष अधिकारी, श्रीमती रीमा अधिकारी, माहेश्वरी पांडे, पुनीत कृष्णा डॉ एके सिंह डॉ बीना सिंह, सुदीप शर्मा, छबिलाल सोनी, अनीता झा, शरदेन्दु झा,कल्याणी तिवारी,रजनीश श्रीवास्तव,कवि कुमार जगदलवी, मीनाक्षी बाजपेई, मन्नू लाल यादव, राजशेखर चौबे, डॉक्टर महेंद्र ठाकुर, विवेक शर्मा इमला, चंद्रशेखर नायडू, उत्तम देवहरे, राकेश उपाध्याय राजाराम रसिक ने नशे के विरोध में तथा मुक्त विषय काव्य पाठ किया। इसके अलावा बड़ी संख्या में साहित्य रसिक उपस्थित थे।  धन्यवाद ज्ञापन डॉ उदय भान सिंह चौहान ने किया। यह जानकारी संस्था की महिला प्रकोष्ठ की सचिव सुमन शर्मा वाजपेई ने दी है।
 
संजीव ठाकुर, अंतरराष्ट्रीय कवि

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