पृथक पूर्वांचल राज्य समय की मांग जनमोर्चा ने गिनाए अलग राज्य बनने के बड़े फायदे

छोटा राज्य बनने से शासन तंत्र को बेहतर ढंग से प्रबंधित व अधिकारियों की जबाबदेही तय होगी।

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अजित सिंह/ राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) 

सोनभद्र /उत्तर प्रदेश-

उत्तर प्रदेश के विभाजन और एक अलग पूर्वांचल राज्य के गठन की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। पूर्वांचल राज्य जनमोर्चा के महासचिव अधिवक्ता पवन कुमार सिंह ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अलग राज्य की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि भौगोलिक और प्रशासनिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश का वर्तमान स्वरूप विकास की राह में एक बड़ी चुनौती बन चुका है।

अधिवक्ता पवन कुमार सिंह के अनुसार उत्तर प्रदेश का विशाल आकार प्रशासनिक कार्यों के लिए बाधा साबित हो रहा है। अलग राज्य बनने से सरकार जनता के करीब आएगी, जिससे फाइलों का निस्तारण और प्रशासनिक निर्णय लेने की गति तेज होगी। छोटा राज्य होने से शासन तंत्र को बेहतर ढंग से प्रबंधित किया जा सकेगा, जिससे अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। विज्ञप्ति में कहा गया कि पूर्वांचल क्षेत्र की स्थानीय जरूरतों को लखनऊ में बैठी सरकार पूरी तरह नहीं समझ पाती।

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पृथक राज्य होने पर यहाँ की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार विकास योजनाएं बनाई जा सकेंगी। जब विकास कार्यों में तेजी आएगी, तो नए उद्योग लगेंगे जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। इससे वर्षों से जारी पलायन की समस्या पर प्रभावी रोक लग सकेगी। पवन कुमार सिंह ने पूर्वांचल, विशेषकर सोनभद्र की खनिज संपदा का जिक्र करते हुए कहा कि यहाँ कोयला, चूना पत्थर, बॉक्साइट और एल्युमिनियम जैसे प्राकृतिक संसाधनों का भंडार है। एक अलग राज्य के रूप में पूर्वांचल इन संसाधनों से प्राप्त राजस्व का उपयोग सीधे इसी क्षेत्र के उत्थान के लिए कर सकेगा। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी सुधार आएगा।

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आर्थिक और प्रशासनिक लाभों के अलावा अधिवक्ता सिंह ने सांस्कृतिक अस्मिता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अलग राज्य बनने से पूर्वांचल की विशिष्ट संस्कृति, भाषा और लोक कलाओं को संरक्षण मिलेगा। यह क्षेत्र के लोगों के बीच एकजुटता और गौरव की भावना पैदा करेगा।पूर्वांचल राज्य जनमोर्चा की मांग है कि उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग को काटकर उसे एक स्वतंत्र राज्य की मान्यता दी जाए। संगठन का मानना है कि यह केवल एक राजनीतिक मांग नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के बेहतर भविष्य और सर्वांगीण विकास का एकमात्र रास्ता है।

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